लखनऊ में 77 सेवानिवृत्त शिक्षकों का भव्य सम्मान, अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह के साथ रामायण और कुरान भेंट कर दी गई भावभीनी विदाई

जनपत की खबर , 36

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने आयोजित किया सम्मान समारोह, अधिकारियों ने शिक्षकों के योगदान को बताया अमूल्य; नई पेंशन योजना को लेकर भी दी अहम सलाह।

लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, लखनऊ के तत्वावधान में 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए 77 शिक्षकों के सम्मान में 'सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मान समारोह-2026' का भव्य आयोजन कंपोजिट विद्यालय भरोसा, काकोरी में किया गया। समारोह में शिक्षा जगत से जुड़े अधिकारियों, शिक्षक नेताओं और बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लेकर सेवानिवृत्त शिक्षकों के लंबे और समर्पित सेवाकाल को सम्मानपूर्वक याद किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपनिदेशक माध्यमिक, षष्ठ मंडल लखनऊ पी.एन. सिंह, सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा षष्ठ मंडल श्याम किशोर तिवारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार तथा वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा निलोत्तम चौबे ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इसके बाद कंपोजिट विद्यालय भरोसा के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया।
समारोह में जनपद लखनऊ के सभी आठ विकासखंडों एवं नगर क्षेत्र से सेवानिवृत्त हुए 77 शिक्षकों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह तथा रामायण और कुरान भेंट कर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं तथा उनका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
इस अवसर पर वित्त एवं लेखाधिकारी निलोत्तम चौबे ने नई पेंशन योजना (एनपीएस) के अंतर्गत आने वाले शिक्षकों को महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा कि सभी पात्र शिक्षक शीघ्र अपना प्राण (PRAN) नंबर आवंटित कराकर पेंशन अंशदान की कटौती प्रारंभ करा लें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

  1. समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रादेशिक उपाध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष सुधांशु मोहन ने की, जबकि संचालन जिला मंत्री वीरेंद्र सिंह ने किया। कार्यक्रम में प्रांतीय मंत्री वंदना सक्सेना, प्रांतीय उपाध्यक्ष, विभिन्न विकासखंडों एवं नगर इकाइयों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। समारोह का उद्देश्य सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान के साथ उनके शिक्षा क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को नई पीढ़ी के सामने प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करना रहा।

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