ऑटो-अप्रूवल व्यवस्था पर परिवहन कर्मचारियों का विरोध

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चेतावनी— जिम्मेदारियां स्पष्ट नहीं हुईं तो होगा आंदोलन, काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध न्यायालय तक पहुंचेगा मामला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की जनसेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन, संपर्क रहित (Contactless) और ऑटो-अप्रूव्ड (Auto-Approved) बनाने की तैयारी के बीच विभागीय कर्मचारियों ने नई व्यवस्था पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए सरकार से जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण करने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि ऑनलाइन प्रणाली में विभागीय सत्यापन की भूमिका समाप्त की जाती है, तो उन पर कानूनी जवाबदेही भी नहीं डाली जानी चाहिए। मांगों पर विचार नहीं होने की स्थिति में कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है।
शनिवार को लखनऊ स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय परिसर में उत्तर प्रदेश संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ की वार्षिक आम सभा आयोजित हुई। बैठक में प्रदेशभर से आए कर्मचारियों और पदाधिकारियों ने विभाग से जुड़े विभिन्न लंबित मामलों पर चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए। बैठक में कर्मचारियों ने कहा कि शासन स्तर पर परिवहन विभाग की अधिकांश सेवाओं को ऑटो-अप्रूवल प्रणाली के तहत लाने की प्रक्रिया चल रही है। यदि दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन और अनुमोदन विभागीय स्तर पर नहीं होगा, तो भविष्य में किसी न्यायालय अथवा जांच एजेंसी द्वारा मांगी जाने वाली सूचनाओं और अभिलेखों की जिम्मेदारी भी संबंधित डीलर या आवेदक पर ही तय की जानी चाहिए। कर्मचारियों का तर्क है कि जिस प्रक्रिया में उनकी वास्तविक भूमिका नहीं होगी, उसके सत्यापन के लिए उन्हें उत्तरदायी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा।
कर्मचारियों ने आशंका जताई कि अन्य राज्यों से वाहन हस्तांतरण समेत कई ऑनलाइन सेवाओं में अपलोड किए गए दस्तावेजों की वास्तविक जांच का अवसर विभागीय कर्मचारियों को नहीं मिलेगा। इसके बावजूद यदि किसी फर्जी या त्रुटिपूर्ण दस्तावेज के आधार पर भविष्य में विवाद उत्पन्न होता है, तो कानूनी कार्रवाई का सामना कर्मचारियों को करना पड़ सकता है। इसलिए नई व्यवस्था लागू करने से पहले जवाबदेही और अधिकारों का स्पष्ट निर्धारण किया जाए।
आम सभा में कर्मचारियों ने वर्षों से लंबित लिपिक संवर्ग के एसीपी प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण, यात्रीकर एवं मालकर अधिकारी के रिक्त पदों को शिथिलीकरण के माध्यम से भरने तथा पिछले तीन वर्षों से लंबित लिपिक संवर्ग के पुनर्गठन की प्रक्रिया को तत्काल पूरा करने की भी मांग उठाई।
सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि इन मांगों पर नियमों के अनुरूप शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो कर्मचारी आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे। कर्मचारियों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि चाहते हैं कि नई प्रणाली के अनुरूप अधिकार और जवाबदेही का संतुलित निर्धारण किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी कर्मचारी को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
इस अवसर पर परिवहन विभाग लखनऊ स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय के अध्यक्ष कृष्ण चंद, महामंत्री सरफराज, सेवानिवृत पूर्व अध्यक्ष एस पी मालवीय, वरिष्ठ लिपिक प्रकाश नारायण, पवन तिवारी, पंकज सिंह, विनय शाही, यशवंत सिंह, के के दुबे, विनोद द्विवेदी, आदि कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

परिवहन कर्मचारी संघ लखनऊ आरटीओ कार्यालय के प्रदेश अध्यक्ष किशनचंद ने कहा कि यदि हमें ऑटो अप्रूवल व्यवस्था पर कार्य करना है तो ऑनलाइन ही शादी विवाह की व्यवस्था भी कर देनी चाहिए यदि हम पेपर देखकर अप्रूवल ही नहीं करा सकते तो हमारा वेरिफिकेशन करने का क्या मतलब रहा है हम सरकार के निर्देशों का पालन करेंगे लेकिन कोई फर्जी पेपर और आईडी लगाकर वाहन ट्रांसफर हो जाएगा तो उसकी जिम्मेदारी हमारी कर्मचारियों की कैसे होगी हम न्यायालय और विभाग की कार्रवाइयों का सामना करने के लिए बाध्य नहीं होंगे हम इसका विरोध करेंगे न्यायालय उच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ेगा तो हम जाएंगे और आंदोलन करेंगे काली पट्टी बांधकर इस कार्य का विरोध करेंगे।

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