भारत के ‘अंग फिटमेंट केंद्र’ से मलावी के दिव्यांगों को मिलेगा नया जीवन

जनपत की खबर , 148

लिलोंग्वे। भारत ने आर्थिक तौर पर कमजोर अफ्रीकी देश मलावी में स्थायी ‘कृत्रिम अंग फिटमेंट केंद्र’ की स्थापना के लिए मलावी गणराज्य सरकार को 1,000 कृत्रिम अंग सौंपे। यह पहल ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता के साथ ही भारत-मलावी के बीच सुदृढ़ द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाती है।
दरअसल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अक्टूबर 2024 में मलावी के अपने आधिकारिक दौरे के दौरान देश में एक स्थायी कृत्रिम अंग (जयपुर फुट) फिटमेंट केंद्र स्थापित करने की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य दिव्यांग लोगों का पुनर्वास करना है। यह केंद्र जोंबा सेंट्रल अस्पताल में स्थापित किया जा रहा है। इससे पहले भारत के सहयोग से 2024 में लिलोंग्वे के कामुज़ू सेंट्रल हॉस्पिटल में दिव्यांगों को कृत्रिम अंग लगाने के लिए एक बड़ा शिविर आयोजित किया गया था। अब भारत की ओर से एक हजार कृत्रिम अंगों को भेंट करने के साथ ही स्थायी फिटमेंट केंद्र की स्थापना की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिया गया है। यह पहल 'इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी' के तहत शुरू की गई है। 
मलावी के लिलोंग्वे स्थित भारतीय उच्चायोग ने  सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से, भारत के उच्चायुक्त अमराराम गुर्जर ने भारत सरकार की पहल “मानवता के लिए भारत” के अंतर्गत ज़ोम्बा सेंट्रल अस्पताल में स्थायी कृत्रिम अंग फिटमेंट केंद्र की स्थापना के समर्थन के लिए मलावी गणराज्य की सरकार को औपचारिक रूप से 1,000 कृत्रिम अंग सौंपे।
उच्चायोग ने कहा केंद्र को कृत्रिम अंग तैयार करने और कर्मियों को प्रशिक्षण देने के लिए आवश्यक मशीनरी से लैस करके, साझेदारी का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा वितरण को बढ़ाना, गतिशीलता में सुधार करना तथा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए मानवीय सम्मान को बहाल करना एवं पुनर्वास सेवाओं में स्थानीय विशेषज्ञता को मजबूत करना है।
बता दें कि भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के सहयोग से ‘इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम के अंतर्गत ग्लोबल साउथ यानी गरीब एवं विकासशील देशों में समय-समय पर कृत्रिम अंग फिटमेंट कैंप आयोजित किए जाते रहे हैं। इसका संचालन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (बीएमवीएसएस) द्वारा किया जाता है। मलावी स्थित भारतीय उच्चायोग के सहयोग से 2018 और 2024 में लगाए गए शिविरों में 1,100 से अधिक मलावी नागरिक लाभान्वित हुए थे।

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