गणतंत्र दिवस पर डीजीपी ने फहराया ध्वज, कहा—संवैधानिक मूल्यों से ही बनेगी नागरिक-मित्र पुलिस

जनपत की खबर , 112

लखनऊ, 26 जनवरी।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश द्वारा तिलक मार्ग स्थित अपने आवास/कैम्प कार्यालय तथा पुलिस मुख्यालय, गोमती नगर विस्तार परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों को संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई गई।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक ने प्रदेश के समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार के प्रत्येक प्रहरी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अमर राष्ट्र-बलिदानियों को नमन करते हुए कहा कि उनके त्याग और बलिदान से ही हमारा गणराज्य अस्तित्व में आया है। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस के उन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने जनता की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस प्रोफेशनलिज़्म, तत्परता और अपराधों के प्रति Zero Tolerance की नीति के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Zero Tolerance तभी प्रभावी होगा, जब वह हर पुलिसकर्मी के दैनिक व्यवहार और निर्णयों में परिलक्षित हो।
उन्होंने कहा कि संविधान राज्य और नागरिक के संबंधों को अधिकार, कर्तव्य और जवाबदेही के संतुलन पर आधारित करता है। पुलिसिंग का उद्देश्य यह होना चाहिए कि ये मूल्य नागरिकों को सुरक्षा, सम्मान और भरोसे के रूप में अनुभव हों। Rule of Law का अर्थ है—कार्रवाई व्यक्ति-निरपेक्ष, तथ्य-आधारित, निष्पक्ष और विधिसम्मत हो तथा प्रत्येक नागरिक को समान सुरक्षा और समान सुनवाई मिले।
नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि थानों पर व्यवहार, शिकायतों की सुनवाई, प्रक्रिया की स्पष्टता और समयबद्ध निस्तारण नागरिकों की गरिमा और विश्वास से सीधे जुड़ा है। जन-शिकायत निस्तारण को उन्होंने न्याय तक पहुंच का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।
महिला संबंधी मामलों में उन्होंने रोकथाम, त्वरित सहायता, संवेदनशील सुनवाई और प्रभावी विवेचना को प्राथमिकता देने की बात कही तथा मिशन शक्ति तंत्र और Mission Shakti Kendra को ग्राउंड-लेवल सपोर्ट सिस्टम के रूप में और सशक्त करने पर जोर दिया।
डिजिटल सुरक्षा पर प्रकाश डालते हुए पुलिस महानिदेशक ने कहा कि साइबर अपराध केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निजता और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने बताया कि जनपद और इकाई स्तर पर प्रशिक्षित साइबर हेल्प डेस्क को मजबूत किया जा रहा है, ताकि पीड़ितों को त्वरित सहायता मिल सके।
उन्होंने कहा कि निष्पक्ष विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य-संकलन और पीड़ित का भरोसा ही प्रभावी न्याय की बुनियाद है। फॉरेंसिक ढांचे के विस्तार की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में 18 फॉरेंसिक लैब की स्थापना की गई है और उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान (UPSIFS), लखनऊ के माध्यम से प्रशिक्षण और शोध को संस्थागत आधार मिला है।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पुलिस बल की क्षमता केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि मनोबल, स्वास्थ्य और आपसी बंधुत्व से भी तय होती है। उन्होंने बताया कि 60,000 नव-भर्ती कांस्टेबलों के लिए Hybrid Mode Specialised Training को मानकीकृत प्रणाली के रूप में लागू किया जा रहा है, जिसमें संवैधानिक आचरण, नागरिक-मित्र व्यवहार, बेसिक लॉ, साइबर जागरूकता और आपात प्रतिक्रिया पर विशेष फोकस है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में उत्तर प्रदेश पुलिस की पहचान विधिसम्मत कार्रवाई, नागरिकों के प्रति सम्मान और समयबद्ध सेवा के तीन स्तंभों पर और सुदृढ़ की जाएगी।
इस अवसर पर उन्होंने जानकारी दी कि गणतंत्र दिवस पर भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस के 18 कार्मिकों को वीरता पदक, 4 को राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक तथा 68 को सराहनीय सेवा पदक प्रदान किए गए हैं। वहीं, माननीय मुख्यमंत्री द्वारा 10 पुलिसकर्मियों को मुख्यमंत्री वीरता पदक एवं 25 को मुख्यमंत्री प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। पुलिस महानिदेशक ने सभी सम्मानित कार्मिकों को बधाई दी।
साथ ही मुख्यालय में नियुक्त विभिन्न पुलिस कार्मिकों को उत्कृष्ट, सराहनीय एवं प्रशंसा चिन्ह से अलंकृत किया गया।

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