गणतंत्र दिवस पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की झलक, सीएम योगी ने कलाकारों को किया सम्मानित
जनपत की खबर Jan 26, 2026 at 04:55 PM , 107लखनऊ, 26 जनवरी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर विभिन्न राज्यों की कला-संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपने-अपने प्रदेशों की लोक संस्कृति और लोक नृत्यों की सांस्कृतिक सुगंध लेकर उत्तर प्रदेश पहुंचे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने भी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश” विषयक सांस्कृतिक प्रस्तुति को भव्य और गरिमामयी स्वरूप प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कलाकारों से संवाद किया, उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की और उन्हें उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक व पर्यटन स्थलों के भ्रमण का आमंत्रण दिया। कलाकारों ने मुख्यमंत्री से मिलकर प्रसन्नता व्यक्त की, आभार जताया और उनके सुशासन की प्रशंसा की।
उत्तर प्रदेश भारत की सांस्कृतिक भूमि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य होने के साथ-साथ आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की भूमि है। तमिलनाडु से लेकर जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल से गुजरात, महाराष्ट्र और सिक्किम तक के लोग यहां आते हैं। भिन्न-भिन्न भाषाएं, कलाएं और परंपराएं होते हुए भी सभी को एक सूत्र में जोड़ने वाला भाव ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को सशक्त बनाता है।
पूर्वोत्तर राज्यों का विकास से जुड़ाव प्रेरणादायी
मुख्यमंत्री ने त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम का उल्लेख करते हुए कहा कि ये राज्य अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। त्रिपुरा से आए 28 कलाकारों की गणतंत्र दिवस परेड में सहभागिता देश की सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण है। इतनी दूर से आकर कार्यक्रम में भाग लेना अत्यंत सराहनीय है।
भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय को निभानी होगी समन्वयकारी भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश का पहला कला एवं संस्कृति को समर्पित विश्वविद्यालय है। राष्ट्रीय पर्वों, दीपोत्सव, उत्तर प्रदेश दिवस और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों में विभिन्न राज्यों के कलाकारों के साथ संयुक्त प्रस्तुतियां तैयार करना विश्वविद्यालय का दायित्व होना चाहिए। पूर्वांचल का बिरहा, अवध की रामकथा, ब्रज की कृष्णलीला, बुंदेलखंड का आल्हा सहित अन्य लोककलाओं को समाहित कर लघु लेकिन प्रभावशाली प्रस्तुतियां विकसित की जानी चाहिए।
मथुरा, प्रयागराज और अयोध्या के कलाकारों को विशेष संदेश
मुख्यमंत्री ने मथुरा के कलाकारों से अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का आह्वान किया। प्रयागराज के कलाकारों से उन्होंने कहा कि माघ मेला अब कुंभ के समान विराट स्वरूप ले चुका है, जहां लोककलाओं की व्यापक प्रस्तुति होनी चाहिए। अयोध्या के कलाकारों से उन्होंने दीपोत्सव में नियमित सहभागिता कर अयोध्या की कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और अन्य राज्यों के कलाकारों के साथ संयुक्त मंचन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोककला और संस्कृति भारत की आत्मा हैं, जो देश की एकता, विविधता और समरसता को सशक्त बनाती हैं।
लोक कलाओं से सजी ‘विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश’ की प्रस्तुति
मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश के कलाकारों द्वारा शंख वादन, डमरू वादन, बधावा, मयूर और ढेढ़िया नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कथक नृत्य ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के लोकनृत्यों—मध्य प्रदेश का बधाई नृत्य, महाराष्ट्र का लेजियम, जम्मू-कश्मीर का रऊफ, सिक्किम का तमांग सेलो, गुजरात का तलवार रास—ने आयोजन को राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच का स्वरूप प्रदान किया। बिहार, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश से आए कलाकारों ने भी देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियों के माध्यम से “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश” की सांस्कृतिक संकल्पना को जीवंत किया।
कलाकारों के अयोध्या भ्रमण के निर्देश
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक समूह के मुखिया से संवाद करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आने पर कलाकार यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण अवश्य करें। एक समूह द्वारा अयोध्या जाने की इच्छा जताए जाने पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जो भी कलाकार अयोध्या जाना चाहें, उनके भ्रमण की समुचित व्यवस्था की जाए।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश सहित कुल 10 राज्यों के 18 समूहों के 261 कलाकारों को सम्मानित किया। इनमें पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम और त्रिपुरा के कलाकार शामिल रहे।











































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