मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 27 लाख बेटियों को संबल, योगी सरकार ने 647 करोड़ रुपये किए व्यय
जनपत की खबर Jan 03, 2026 at 09:22 PM , 91लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बालिकाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर प्रभावी प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि समाज की सशक्त आधारशिला हैं। इस योजना के माध्यम से अब तक लगभग 27 लाख बालिकाओं को लाभ पहुंचाया जा चुका है, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित और सशक्त हो रहा है।
योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना तथा बालिकाओं के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना है। आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक कुल 647.21 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय की जा चुकी है। यह दर्शाता है कि यह योजना केवल कागजी घोषणा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू की जा रही है।
राज्य सरकार ने योजना के लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था की है। चालू वित्तीय वर्ष में ही 3.28 लाख लाभार्थियों को 130.03 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। इससे स्पष्ट है कि योगी सरकार बालिकाओं के कल्याण को दीर्घकालिक नीति के रूप में आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना आज प्रदेश में बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और शैक्षिक सशक्तिकरण की एक सशक्त पहचान बन चुकी है।
वर्ष 2019 में शुरू की गई इस योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के मूल निवासी परिवारों की बालिकाओं को दिया जा रहा है। पात्रता के अनुसार परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा परिवार में अधिकतम दो बच्चे होने चाहिए। योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कारणों से किसी भी बालिका की शिक्षा या विकास बाधित न हो।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार ने योजना के अंतर्गत दी जाने वाली कुल सहायता राशि को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है। यह राशि छह चरणों में प्रदान की जाती है। जन्म के समय 5,000 रुपये, दो वर्ष की आयु पर टीकाकरण पूर्ण होने पर 2,000 रुपये, कक्षा 1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा 6 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा 9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये तथा कक्षा 10 या 12 की परीक्षा उत्तीर्ण कर डिप्लोमा, स्नातक अथवा उससे अधिक अवधि के डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने पर 7,000 रुपये की सहायता दी जाती है।
यह योजना बालिकाओं को प्रत्येक शैक्षिक पड़ाव पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।































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