लेखपाल द्वारा गई की जांच में अवैध कब्जा की पुष्टि, फिर भी कार्रवाई शून्य
लखीमपुर खीरी Jan 13, 2026 at 06:10 PM , 145नित्यानंद बाजपेई/हरिशंकर मिश्र
लखीमपुर खीरी। जनपद में बच्चों की खेल शिक्षा और स्वास्थ्य तथा बच्चों के हकों पर डाका डालने वाला एक सनसनीखेज ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसे सुनकर आपके पैरों के ताले की जमीन खिसक जाएगी। विकास के नाम पर विनाश के सौदागरों ने चंद कागज़ के टुकड़ों की खातिर दबंग भू माफियाओं से साठ गांठ करके दशकों वर्ष पुराने और राजस्व अभिलेखों में दर्ज खेल मैदान को दफन करना शुरू कर दिया गया। और इसकी रक्षा को नियुक्त लोक सेवक स्वयं भक्षक की भूमिका में नजर आते हुए वह भू माफिया के ताल पर थिरकते देखे जा रहे हैं।
साजिश की गहराई:_ कौन है इस खेल मैदान और प्राइमरी पाठशाला भूमि की तबाही का मास्टरमाइंड _
खबर मिली है कि ग्राम पंचायत जटपुरा में खेल मैदान और प्राइमरी पाठशाला की आरक्षित, जमीन के साथ साथ खलिहान, हरिजन बस्ती की आरक्षित सरकारी जमीनों पर कई राशूखदार दबंग किस्म लोगो ने प्रधान, लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक से मिलीभगत करके ग्राम पंचायत की रिक्त पड़ी सरकारी जमीनों तथा खेल मैदान का गला घोंटने या यूं कहे वजूद मिटाने की सुपारी ले रखी है। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी सरकारी परमिशन और बगैर बिना किसी भाई के खुले आम अवैध कब्जा करके आलीशान मकान और दुकान खड़ी कर ली गई मौके पर जब ग्रामीणों ने विरोध किया तो वहां मौजूद अवैध कबजेदारों द्वारा दादागिरी दिखाई जाने के आप भी लगाए जा रहे हैं लेकिन उक्त अवैध कब्जा धारकों के पास दिखाने के लिए एक कागज का टुकड़ा तक नहीं है।
बच्चों की खेल शिक्षा पर मंडराया खतरा_
यहां पर सिर्फ सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे का मामला नहीं बल्कि बच्चों के खेल के मैदान पर अवैध कब्जा कर बिल्डिंग बनाएं जाने का मामला है जो बच्चों के भविष्य को संवारने और खेल के प्रतिभा निखारने वाला स्थान और बच्चों के भविष्य का मैदान है। यदि यह खेल मैदान नष्ट हो गया तो हजारों बच्चों की खेल प्रतिभाओं का गला घुट जाएगा और सरकार की मंशा पर भी पानी फिर जाएगा।
प्रशासन को सीधी चुनौती:_आख़िर कब जागेगा कुंभकर्णी नीद में सोया सिस्टम?
ग्रामीण और समाजसेवी लोगों में राजेंद्र कुमार ने इस असम में अपराध के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। और मुख्यमंत्री सहित शासन प्रशासन को शिकायती पत्र देकर पूछा है क्या दबंग और रसूखदारों को कानून से ऊपर रहने और खेल मैदान ,प्राइमरी पाठशाला के नाम दर्ज कागजात सरकारी भूमि पर कब्जा करने की खुली छूट मिली हुई है?
जनता पूछ रही है _आखिर किसकी सह पर खेल मैदान और प्राइमरी पाठशाला की आरक्षित देश कीमती जमीन पर बनाए जा रहे मकान और दुकान?
ऐसी क्या मजबूरी है जो खेल मैदान और प्राइमरी पाठशाला के आरक्षित जमीन पर किए गए पक्के निर्माण का ध्वस्थिकरण नहीं किया जा रहा है? क्या प्रशासन ने अवैध कबजेदारों के सामने घुटने टेक दिए हैं? क्या योगी सरकार खेल मैदान का वजूद मिटाए जाने का तमाशा देखती रहेगी।
उपरोक्त मामले में ग्रामीण और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि यदि खेल मैदान से अवैध कब्जा न हटाया गया और खेल मैदान तथा प्राइमरी पाठशाला के नाम दर्ज कागजात जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले दोषी लोगों पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही नहीं की गई तो यह मामला कागजों तक ही सीमित नहीं रहेगा जन आंदोलन की आज मुख्यालय तक पहुंचेगी और साथी उच्च न्यायालय का चलेगा कई जिम्मेदार अफसर पर कानूनी हंटर। अब देखना यह है ऊंट किस करवट बैठता है खेल मैदान और प्राइमरी पाठशाला के नाम दर्ज जमीन को अवैध कब्जा मुक्त कराया जाता है या फिर यूं ही पूर्व की भाती लीपापोती कर मामले को फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।






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