*अधिकारियों की लापरवाही से प्रधानों पर संकट, जनता में आक्रोश।*

लखीमपुर खीरी , 220

पलियाकलां-(खीरी) पंचायतों के चुनाव जैसे जैसे नजदीक आते जा रहे हैं वैसे ही गांव देहात के ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है एक तरफ पंचायतों के चुनाव नजदीक आ रहे और तमाम धुरंधर रात दिन एक करने पर तुले हुए हैं इसी बीच चौंकाने वाला खुलासा हो रहा है।
बताया जाता है कि गांवों में सरकार की योजनाएं उन तक पहुंची जिन्हें इसकी कोई जरूरत नहीं थी और उनको ठोकरें मिली जिन्हें लाभार्थी कहा जाता है। यह कोई एक जगह या पंचायतों का मामला नहीं तमाम विभागों में बैठे सरकार की नौकरी करने वाले भेदभाव कर योजनाओं का लाभ दे रहे हैं और सगे संबंधियों व अपनी जात वालों को इसका लाभ दे रहे हैं। जितने भी पंचायतों में विकास के नाम पर योजनाओं का लाभ लिया है  अगर उनकी गहनता से जाच हो जाए तो सरकारी कुर्सी पर बैठे लोग और समाज के ठेकेदार बने पंचायतों के रखवालों की पोल खुल जाएगी। 
अभी हाल ही में पलिया ब्लाक के आस पास गांव में बड़े घोटाले की बू आ रही है फिर चाहें राजस्व का मामला हो या फिर विकास कराए गए कामों का काला चिठ्ठा हो अगर सभी में अवैध कब्जा और योजनाओं में गड़बड़ियां कर अपनो को भरपूर लाभ दिया गया है। 
और मजे की बात जब से पंचायतों में सचिव, सेक्रेट्री व पंचायत मित्र का रवैया तानाशाही जैसा बना हुआ है तब से गाव वासियों का कोई भी काम होना तो दूर की बात सही ढंग से बात नहीं करते यहां तक कभी प्रधान की तो कभी  ब्लाक की धमकी दी जाती है। 
गांव वासियों का कहना किसी भी पंचायत सचिव सेक्रेट्री व पंचायत मित्र के पास जाओ तो काम तो करते नही साथ ही गांव में बनी सड़कें बंजर पानी की टंकी गड़बड़ियां और योजनाओं को नहीं देते। 

*ग्रामीण इलाकों में जयचंदों से प्रधानों को करनी पड़ती जद्दोजहद।*

कहने को तो विभागों में बैठे तमाम कर्मचारी के लोग दर्जनों सर्वे करते रहते लेकिन किसी भी लाभार्थी ग्रामीणों का काम होता तो दिखाई नहीं दिया । जबकि सूट बूट लग्जरी गाड़ियां और कलम डायरी पीछे सरकारी लोग लेकर गांवों में इस कदर पहुंचते जैसे गांव को बड़ी योजनाओं से जोडकर बड़ी सौगात देने आए हैं लेकिन जाने के बाद सालों साल कुछ नही होता। अब तो ग्रामिणो का कहना है कि जब बंदरबाट करना होता है तो सर्वे होता है और बाद में सब गायब हो जाते। प्रधानों की बात करे तो अब प्रधान सिर्फ साफ सफाई के अलावा और कोई काम बचा ही नहीं है। नाम ना खोलने की शर्त पर दबी जुबान से एक प्रधान ने कहा सरकारी मुलाजिम और विभागों से ही काम नहीं होता तो हम कहां से कराए सैकड़ों बार लिखकर दिया यही नहीं अधिकारियों की बैठकों में कामों का ब्योरा रखा एक भी काम नहीं दिया जाता जबकि हर विभाग में पंचायत सचिव सेक्रेट्री व पंचायत मित्र और दर्जनों विभागों के कर्मचारी मौजूद रहते उसके बाद भी काम न होना बड़ी शर्म की बात है हमे तो इन्हीं के साथ रहना और इन्हीं लोगों का काम करना होता है अगर काम नहीं करेगे तो कोई हमे क्यों वोट देगा।

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