ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी को पत्र लिखकर लगाई गुहार हमें घर से बेघर ना करें सरकार

लखीमपुर खीरी , 123

(देवनाथ मिश्रा)


सम्पूर्णानगर खीरी। ट्रांस शारदा क्षेत्र के ग्राम शास्त्री नगर थाना हजारा तहसील पूरनपुर जनपद पीलीभीत ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी को पत्र लिखकर निवेदन किये हैं कि हमारे घरों को ना उजाड़ा जाए वर्ष 1993 में ग्राम पंचायत चंदिया हजारा व शास्त्री नगर भू- कटान पिड़ितों को जिलाअधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश पर और प्रधानमंत्री द्वारा दिए गये आवास योजना के तहत हम सभी यहां दुबारा अपना घर बनाकर रह रहे हैं हमें यहां से हटाये जाने का कारण शारदा नदी पर बन रहे सेतु पर सड़क बनने का है जो रास्ते का मैप हमारे घरों से लगभग 50_60 फीट की दुरी पर है पुराने (लोक निर्माण विभाग) के मैप के मुताबिक सेतु निर्माण का सड़क निकाला जाये।
बता दें कि पुराने मैप में रास्ता 50 से 60 फीट की दुरी पर है जिसमें 6 से 7 फीट का गड्ढा है उस गड्ढे को न भरकर ठेकेदार अपने फायदे के लिए ग्रामीणों के घरों को उजाड़ने की फिराक में है 
जिन ग्रामीणों के घरों को चिन्हित कराया गया है उनके नाम- अजय कुमार, उर्मिला देवी, हरिश्चंद्र, बिरेन्द्र प्रसाद, विरेन्द्र कुमार, विशम्भर,रजनीश, रामचंद्र लाल,रामसरन,हरिवंश, श्यामलाल,रोहित,मनोज,
रामनक्षत्र, विवेक कुमार,परमात्मा, श्रीमती देवी हैं।
अतः ग्रामीणों का कहना है कि उनका अहित ना हो और मैप में जो पुराना सड़क है उसी पर पुनः कार्य किया जाये ग्रामीणों का कहना है कि हम सब सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं कर रहे हैं उच्च अधिकारियों से निवेदन है कि पुराने मैप में जो रास्ता है उसी पर आप सड़क निर्माण का कार्य सुचारू रूप से करवायें।
अवगत करा दें कि पुराना सड़क भानपुरी खजुरिया से पूरनपुर जानेपर मार्ग से बांई तरफ 50 से 60 फीट की दूरी पर है और मार्ग के दाहिने तरफ थाना हजारा था थाने से लगभग 300 मीटर की दूरी पर पंचायत भवन था और थाना से सटे सड़क की बांई तरफ शिव मंदिर था यह सभी स्थान शारदा नदी के भू-कटान के चपेट में आ गया था थाना हजारा भू-कटान की वजह से वर्तमान में मौरनिया गांधी नगर में स्थित है।

(ग्रामीणों द्वारा शासन प्रशासन से निवेदन)

ग्रामीणों का कहना है की सड़क निर्माण का कार्य हमारे घरों को तोड़कर करना है तो हम सभी भू- कटान पिड़ितों को समय रहते मुआवजा और रहने के लिए सरकार द्वारा किसी दूसरे स्थान पर एक एक मकान बनाकर दे दिया जाये जहां हम रहकर मेहनत मजदूरी करके अपना जीवन यापन कर सकें।

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