रेल चलाओ पलिया बचाओ के तहत अनशन के सातवेंं दिन रविवार दस लोगों ने दिया धरना

लखीमपुर खीरी , 270

(वीके त्रिपाठी/सुनील शर्मा)


    पलिया कलां‌ लखीमपुर खीरी। विगत 28-29 जून को पहाड़ों पर हुई भीषण बरसात के बाद शारदा नदी में आई बाढ के कारण मैलानी नानपारा रेलखंड पर अतरिया रेल क्रासिंग के पास रेल ट्रैक के नीचे बाढ़ के स्टोरेज पानी से रेल लाइन के नीचे नदी के पानी सीपेज तथा बाढ़ के पानी भर जाने के कारण रेल विभाग ने 10 दिनों का अल्टी-मेटम देखकर रेल बंद करवा दी थी।
       इससे रेल बंद होने से क्षेत्र का व्यापार, यातायात तथा कृषि सहित उद्योग-धंधे पूरी तरह प्रभावित हो गये इसे लेकर रेल चलाओ‌ पलिया बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले क्रमिक अनशन के‌ सांतवे दिन रविवार को शारदा वर्ष एसोसिएशन पलिया के महामंत्री अखिलेश कुमार सिंह, व शारदा चीनी मिल मजदूर संघ महामंत्री अफरोज अहमद अंसारी समेत उमेश गुप्ता, शिवम दिवाकर ,मुमताज खान, मोहम्मद नदीम खान, दिनेश सैनी, गणेश गिरी, राकेश कुमार, अखिलेश कुमार सिंह, आज धरना के सातवें‌ दिन क्रमिक अनशन मे‌ मौजूद रहे।
       क्रमिक अनशन पर बैठे लोगो को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार विश्वकान्त त्रिपाठी ने कहा कि वर्षों से चली आ रही रेल को नौकरशाही के खाओ कमाओ नीत के चलते बंद कर दिया गया रेलगाड़ी बंद करने का सीधा श्रेय प्रदेश के सिंचाई विभाग की उदासीनता और सरकार अनदेखी का परिणाम है। 
     यदि सिंचाई विभाग शारदा नदी के पानी को चैनेलाज कर बाढ़ रोकने का उचित प्रबंध करता तो रेलवे‌ बोर्ड रेल नहीं बंद करनी‌ पड़ती अरबो रुपया खर्च करने के बाद जब रेल विभाग अजीज आ गया तो उसने इस रेल खंड को धरोहर घोषित कर अपने कर्तव्यों से की तीसरी कर ली और पूरे क्षेत्र का विकास अवरोध होने के साथ लगभग क्षेत्र की 25 लाख से अधिक क्षेत्रीय निवासियों को रेल सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है।
        इस रेल खंड का हेरिटेज रेल लाइन होने से पूरे क्षेत्र का बन्टा ढार हो जायेगा, 171 किलोमीटर के मध्य पढ़ने वाले तेरह रेल स्टेशन पूरी तरह बदहाल हो जाएंगे वही साथ ही लगभग 25 लाख की आबादी रेल कनेक्टिविटी से पूरी तरह वंचित हो जाएगी ट्रांस शारदा क्षेत्र की 19 ग्राम पंचायत सहित पलिया और निघासन सहित आंशिक बहराइच नानपारा इलाके की जनता रेल सुविधाओं से वंचित हो जाएगी क्षेत्र में पढ़ने वाले तीन चीनी मिलों की लोडिंग अनलोडिंग पर खासा प्रभाव पड़ेगा पलिया तिकुनिया निघासन आदि क्षेत्रों का विकास अवरुद्ध हो जाएगा साथ ही लोगों की जेब पर चार गुना से ज्यादा बोझ बढ़ेगा आखिर यह सब क्यों हुआ इसके पीछे अगर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश सरकार की सिंचाई विभाग की को कमाऊ नीति के चलते वर्ष 2008-9 से लेकर 2024 तक रेल ने अरबो रूपया रेल ट्रैक की मरम्मत के लिए खर्च किया लेकिन कोई फायदा नहीं मिला,सिंचाई विभाग के अफसर की मनमानी और नेपाल की एक दर्जन से अधिक नदियों का अनकाउंटेड पानी जो शारदा नदी में मिलकर क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न करता है इससे रेल विभाग को रेल लाइन ट्रैक की मरम्मत के नाम पर खासा पैसा खर्च करना पड़ता है, जबकि बाढ़ नियंत्रण उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के नियंत्रण का एक हिस्सा है राज्य सरकार की उदासीनता तथा उत्तरांचल में स्थित बांधों का रखरखाव भी उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पास है यदि समय रहते उत्तर प्रदेश का सिंचाई विभाग को इस ट्रैक को संरक्षित करने की जरूरत पड़ी,अब इस ट्रैक पर आम यात्री सवारी नहीं कर पायेगा बल्कि पर्यटक सवारी करेंगे, जितने दिन पयर्टन सत्र चलेगा उतने दिन ही ट्राय ट्रेन चलेगी ट्राय ट्रेन देखकर बस अब टाटा बाय-बाय करते रहिए। 
     "अगर यूपी का सिंचाई विभाग खुद्दारी और ईमानदारी से बाढ़ नियंत्रण और बचाव का काम करता तो रेल विभाग इस लाइन को हेरिटेज लाइन संरक्षित करने जरूरत नहीं पड़ती,, 
    प्रदेश सरकार की आक्रमंड्यता और उदासीनता का परिणाम है कि अब इलाके से रेल गयी इसका परिणाम क्या होगा कि पलिया विधान सभा सहित आंशिक निघासन आंशिक बहराइच तथा पीलीभीत ट्रांसशारदा क्षेत्र का एक बड़ा एक बड़ा पूरी तरह रेल कनेक्टिविटी से कटकर रेल सुविधाओं के से अछूता रहेगा।
धरने में कामरेड आरती राय,रामकिशन, नरसिंह, रामचंद्र, दया शंकर, रमाशंकर, राजकुमार, विश्वकांत त्रिपाठी,ज्ञानी मनमोहन सिंह, रामविलास शर्मा, विशाल अवस्थी,दिनेश कुमार, हरिश्चंद्र,रहीश अहमद,रंजीत सिंह ने अपनी सहभागिता दी।

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