सरस्वती शिशु वाटिका लखीमपुर में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई वाल्मीकि जयंती

लखीमपुर खीरी , 230

लखीमपुर खीरी।विद्या भारती विद्यालय सनातन धर्म सरस्वती शिशु वाटिका लखीमपुर खीरी में आज वाल्मीकि जयंती का कार्यक्रम बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं वाल्मीकि जी पर माल्या अर्पण कर कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। शिशुओं द्वारा एक लघु नाटिका वाल्मीकि जी के जीवन पर आधारित प्रस्तुत की गई। विद्यालय की प्रथम सहायिका श्रीमती रजनी कपूर ने बताया कि महाकवि वाल्मीकि का जन्म अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन त्रेता युग में हुआ था। नारद जी ने ही इन्हें राम नाम का उच्चारण करवाया तथा राम नाम जपने के लिए नारद जी ने ही इनसे कहा था। जब इन्होंने राम नाम की कठोर तपस्या कई वर्षों तक की तब इनके शरीर पर दीमक ने चारों ओर अपनी  बॉबी बना ली थी इसी के कारण इनका नाम वाल्मीकि पड़ गया।
"उल्टा नाम जपा जग जाना बाल्मीकि भए ब्रह्म समाना "
 भगवान वाल्मीकि जी ने जिनका उल्टा नाम जप कर पूरे संसार में अपना नाम किया ऐसे भगवान राम के नाम को हम लोगों को अवश्य ही जपना चाहिए जिससे हम सभी का जीवन धन्य हो सके। कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती सुचिता तिवारी  ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि जी भगवान राम के पुत्र लव और कुश के गुरु थे। लव और कुश ने भगवान राम की पूरी सेना को परास्त कर दिया था। ऐसे महान गुरु को हर कोई प्राप्त करना चाहेगा इन्हीं के नाम पर मा0 प्रधानमंत्री जी ने अयोध्या के हवाई अड्डे का नाम भी महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा है। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त शिक्षिकाएं बहिनें उपस्थित रही। कार्यक्रम का समापन वन्देमातरम् के साथ हुआ।

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