गुरुमत उच्च प्राथमिक विद्यालय में बिना मान्यता के ही इंटर की पढ़ाई?

लखीमपुर खीरी , 150

(हरिशंकर मिश्र)

लखीमपुर खीरी। मान्यता की आड़ में ब्लॉक फूलबेहड़ में तमाम स्कूल चल रहे हैं इनमें कुछ स्कूलों की कक्षा आठ तक की मान्यता है परंतु पढ़ाई इंटर तक की जा रही है। ऐसे स्कूलों में छात्रों व अभिभावकों का शोषण किया जा रहा है लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदार जानते हुए भी रिश्वत अली के चक्कर में कोई कार्यवाही नहीं करते हैं जिससे बच्चों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। जानकारी के अनुसार इसी तरह का एक विद्यालय ब्लॉक फूलबेहड़ के गुरमत उच्च प्राथमिक विद्यालय अटकोहना सलारपुर में कक्षा 1 से 8 तक की मान्यता है परंतु विद्यालय फिर भी धड़ल्ले से प्रधान अध्यापक इंटर तक चला रहा है। बताया जाता है कि स्कूल की मान्यता में जिन लोगों की शैक्षिक योग्यता की अंक तालिकाएं लगाई गई हैं वह कभी भी विद्यालय पढ़ाने नहीं आते उनके एवज में अनट्रेंड लोग बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं जिसकी अच्छी शिक्षा के नाम ऊंची फीस ली जा रही है जबकि बच्चों के खेलकूद हेतु मैदान भी नहीं है और आग बुझाने के उपकरण भी इस विद्यालय में नहीं हैं।  इस स्कूल में लूट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां कक्षा एक की फीस 1 महीने की₹500 ली जाती है। इसके बावजूद भी विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य अंधकार में हो रहा है। विद्यालय के प्रधान अध्यापक बेसिक शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारी फूलबेहड़ के संरक्षण में मनमानी फीस वसूल रहे हैं। इस तरीके से  पूरे ब्लॉक के अनेकों गांवों में चल रहे हैं जिनको नोटिस देकर जांच के नाम पर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी गण वसूली करते हैं और मामले को रफा-दफा कर देते हैं। जब लोग प्रधानाध्यापक से कुछ कहते हैं तो उनका कथन है कि विद्यालय के प्रबंधक हम लोगों को पैसा ना देकर यह कहते हैं की विद्यालय इतना चलता नहीं है जिससे आप लोगों का वेतन निकाला जा सके लेकिन बताया जाता है कि विद्यालय में बच्चों की संख्या  कम नहीं है।प्रधान अध्यापक का कहना है कि हम लोगों का वेतन भी नहीं निकलता है तथा हम किसी तरीके से स्टाफ का वेतन निकालते हैं। विद्यालय के प्रधान अध्यापक बलजीत सिंह की मनमानी से इस विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य तो अंधकार में है। फॉर्म फीस के नाम पर जमकर वसूली भी करते हैं पास होने की गारंटी भी देते हैं जिसका चढ़ावा अलग से बताया जाता है। बताते हैं कि  इस स्कूल में हरे भरे पेड़ लगे थे वह भी प्रधान अध्यापक की जेब में समा गए।

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