“साधना से नहीं होती है परमात्मा की प्राप्ति: महात्मा आविद आलम”
लखीमपुर खीरी Sep 16, 2025 at 06:18 PM , 733हाथीगवां लखीमपुर। स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में हाथीगवां, कुंडा, प्रतापगढ़ में चल रहे सत्संग कार्यक्रम में बोलते हुए आविद आलम खान ने कहा, परमात्मा परमेश्वर परमब्रह्म या खुदा गॉड भगवान न तो जप तप नेम व्रत होम यज्ञ तीर्थ स्नान अथवा त्याग सन्यास से मिलता है और न ही योग -साधना आदि के सहारे से ही प्राप्त होता है । परमात्मा की प्राप्ति तत्त्वज्ञान से होता है ।
उन्होंने कहा कि जीव को ही आत्मा या ईश्वर और आत्मा या ईश्वर को ही परमात्मा या परमेश्वर मानने वाले लोग साधना से परमात्मा परमेश्वर या खुदा-गॉड-भगवान को प्राप्त कर लेने की घोषणा करते हैं, जबकि जीव एवं ईश्वर(आत्मा)और परमेश्वर (परमात्मा) तीनो हर मामले में अलग अलग हैं। वास्तव में योग-साधना या अध्यात्म से हम जिसे प्राप्त करते हैं, वह परमात्मा-परमेश्वर नहीं बल्कि आत्मा-ईश्वर है और आत्मा-ईश्वर परमात्मा-परमेश्वर का अंश है । उस आत्मा या ईश्वर का मायावी दोष -गुण से युक्त होने को ही जीव कहते हैं । तीनों ही एक दूसरे से हर मामले में सर्वथा भिन्न-भिन्न होते हैं, जिन्हें तत्त्वज्ञान रूप भगवद् ज्ञान के अंतर्गत यथावत साक्षात पृथक पृथक देखा जाता है तथा बातचीत करते हुए उनका परिचय-पहचान भी प्राप्त किया जाता है । गीता वाले विराट रूप को भी सामने ही देखने का सुअवसर तत्त्वज्ञान के अंतर्गत ही हर भगवद् समर्पित-शरणागत जिज्ञासु को प्राप्त होता है । उन्होंने बताया कि वर्तमान मे सन्त ज्ञानेश्वर जी ने अपने हजारों-हजार शिष्यों को जीव ईश्वर परमेश्वर का साक्षात् दर्शन कराया है। जिसमें हम लोगों ने देखा जो परमात्मा परमेश्वर है वही गॉड है जो गॉड है वही अल्लाताला है उसी तरह जो आत्मा ईश्वर ब्रह्म है वही Soul है जो Soul है वही नूर है, उसी तरह जो जीव है वही Self है जो Self है वही रूह है । इसीलिए जो वास्तव में सच्चा हिन्दू है वही सच्चा ईसाई है जो सच्चा ईसाई है वही सच्चा मुसलमान है, जो सच्चा मुसलमान है वही सच्चा जैनी, बौद्ध, सिख भी है । इनमें भेदभाव केवल अज्ञानता के कारण है ।






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