एक शिकारी ने तमगा हासिल करने के उद्देश्य से दुधवा जंगल से रेललाइन हटाने का रचा कुचक्र?
लखीमपुर खीरी Sep 10, 2025 at 05:15 PM , 113विश्वकांत त्रिपाठी/केके शुक्ला
लखीमपुर खीरी। निजी स्वार्थ के चलते एक शिकारी ने तमगा हासिल करने के उद्देश्य से तत्कालीन सरकार और वनाधिकारियों से सांठ-गांठ कर अपनी ऊंची पैठ के चलते थारू समुदाय की एक दर्जन से अधिक ग्राम सभाओं सहित 25 लाख की आबादी को रेल सुविधा से वंचित करने के कु चक्र की इबारत 90 के दशक में लिखदी थी, जिसका परिणाम यह हुआ कि गोंडा -मैलानी रेल खंड पर दुधवा जंक्शन से 100 साल पूर्व बिछाई गयी चंदनचौकी और गौरीफंटा की रेल लाइन को अनुपयोगी कह कर उखड़वा दिया,इस रेल लाइन से अंग्रेजो ने केवल थारू समाज को मुख्य धारा से जोड़ने सहित रेलवे पथ के नीचे बिछाये जाने वाले सांखू के गाटर भी पूरे भारत में यही से सप्लाई किये जाते थे, वहीं थारू समाज की याता-यात का एक प्रमुख साधन भी चंदन चौकी-गौरीफंटा रेल लाइन ही थी, जो सीधे नेपाल राष्ट को भी जोड़ने का एक मात्र जरिया थी इतने में भी उक्त शिकारी का पेट नहीं भरा ! पालिया से लेकर बिलरायां तक रेल लाइन बंद करने की मनसा को अपने जेहन में समेटे हुए उक्त शिकारी ने लगभग 50 किलोमीटर से अधिक रेल लाइन बंद करवाने का भी जाल बिनना शुरू कर दिया, उक्त शिकारी जब गन उठाने लायक नहीं रहा तो उसने वन्य जीव प्रेमी का चोला पहनकर वन्य संरक्षण तथा जीव जंतु प्रेमी होने का ढोंग राज तंगा लेने के फिराक में बना अधिकारियों से साथ गांठ कर वन्य जीव तथा वन संपदा को संरक्षित करने का ढोंग रच वन विभाग के शुभचिंतक होने का चोंगा ओढ़ वनाधिकारियों के साथ मिलकर तमगा हासिल करने की जुगलबंदी शुरु कर प्रदेश तथा राज्य सरकार को फर्ज़ी पत्राचार के माध्यम से रेललाइन व रेलगाड़ियों से दुधवा के शान्तप्रिय जीवों के जीवन को ख़तरा तथा उन्हें संरक्षण देने के लिये दुधवा से रेललाइन हटवाने का कुचक्र शुरु कर, वन्यजन्तु प्रेमियों को दिये पदको की दौड़ की लाइन में उछल-कूद मचानी शुरू कर दी।
ये वही दौर था जब पलिया कलां खीरी के समाजसेवी स्व० बद्री विशाल गुप्ता द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मैलानी फरुखाबाद वाया शाहजहांपुर की पुनः रेललाइन बनाने और मैलानी नानपारा रेलखंड पर गोंडा तक अमान परिवर्तन के लिए भारत सरकार की रेल मंत्री ममता बनर्जी, रामविलास पासवान, लालू प्रसाद, और सोमनाथ चटर्जी तक दौड़ लगा रहे थे, इस बाबत भारत के निवर्तमान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने भी मैलानी नानपारा रेलखंड पर अमान परिवर्तन के लिए अपनी मंशा जाहिर करते हुए मानवीय, व्यापारिक और सामरिक लाभ के दृष्टिकोण से इस रेल लाइन के अमान परिवर्तन के पक्षधर रहे है।






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