सदगुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर 3 दिवसीय अद्भुत सत्संग एवं भजन-कीर्तन का कार्यक्रम

लखीमपुर खीरी , 113

पिपराभुआल लखीमपुर।

सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के अंतर्गत पिपराभुआल, विशुनपुरा बाजार स्थित भगवान सदानन्द पिपरा धाम आश्रम के तत्त्वावधान में 8 जुलाई से 10 जुलाई तक धर्म -धर्मात्मा-धरती रक्षार्थ भजन - कीर्तन एवं सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें जिज्ञासु जनों को भगवान श्री विष्णु जी-श्री राम जी-श्री कृष्ण जी- श्री सदानन्द परमहंस जी के दुर्लभ तत्त्वज्ञान बताया एवं जनाया जायेगा।
उक्त कार्यक्रम की जानकारी देते हुए महात्मा दीपक जी ने कहा इस कार्यक्रम का उद्वेश्य जनमानस को धर्म के नाम पर फैले आडम्बर-ढोंग-पाखंड से बचाना है। उन्होंने कहा आज अगर सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार किसी क्षेत्र में है तो वह धर्म क्षेत्र में ही है। उन्होंने बताया कि- भगवान् एक था एक है एक ही रहने वाला परम सत्ता शक्ति है जो दो भी नहीं होता परन्तु आज हर महत्वाकांक्षी गुरु जी लोग सद्गुरु, जगतगुरु, श्री श्री श्री 108 श्री अनंत श्री आदि आदि पदवी ले लेकर अपने शिष्यों में भगवान् बन रहे हैं और उनके धन और धर्म भाव का दोहन - शोषण कर रहे हैं , जब की ये गुरु जी लोग शरीर में रहने वाले चेतन जीव को भी नहीं जानते और न परमात्मा को ही जानते हैं , नाजानकारी में आत्मा को ही जीव और आत्मा को ही परमात्मा घोषित करने कराने में लगे हैं।
पिपरा धाम आश्रम के महात्मा दशरथ जी ने कहा, सदगुरु वह पूर्ण गुरु होता है जो अपने समर्पित शरणागत शिष्यों को संसार – शरीर – जीव – ईश्वर – परमेश्वर का संपूर्ण जानकारी व दर्शन वाला ‘तत्वज्ञान’  देकर मुक्ति और अमरता का साक्षात् बोध कराते हैं  जो भगवान विष्णु-राम-कृष्णजी ने अपने समर्पित-शरणागत भक्त-सेवकों को कराया था। महात्मा जी ने आगे कहा सन्त ज्ञानेश्वर जी ने अपने भक्त-सेवकों को उसी तत्त्वज्ञान को ही देकर जीव-आत्मा-परमात्मा का आमने-सामने बातचीत के साथ साक्षात दर्शन कराया है। महात्मा जी ने आगे कहा कि ऐसे सदगुरु एक युग में एक मात्र होते हैं जो भगवान के पूर्णावतार कहलाते हैं। उन्होंने कहा कि इस संस्था का एकमात्र उद्देश्य धर्म-धर्मात्मा-धरती की रक्षा ही है। असत्य-अधर्म-अन्याय-अनीति को समूल समाप्त कर सत्य-धर्म-न्याय-नीति को समाज में लागू करने हेतु सन्त ज्ञानेश्वर जी के सकल शिष्य समाज संकल्पित एवं समर्पित है।

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