अवैध मिट्टी खनन को लेकर ग्रामीणों ने थाना दिवस के दौरान की लिखित शिकायत

लखीमपुर खीरी , 273

लखीमपुर खीरी। धौरहरा में खनन माफिया पर शिकंजा ढीला,बता दे कि तहसील धौरहरा के कफारा गांव में अवैध मिट्टी खनन का मामला शनिवार को उस वक्त तूल पकड़ गया जब दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने धौरहरा थाना दिवस के दौरान इसकी लिखित शिकायत की। ग्रामीणों ने गांव में बड़े पैमाने पर जेसीबी से हो रहे अवैध खनन की शिकायत करते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।इसी दौरान, जब एक व्यक्ति ने धौरहरा कस्बे में चल रहे अवैध खनन को लेकर पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) शमशेर बहादुर सिंह से सवाल किया तो सीओ के तेवर अचानक बदल गए। तो व्यक्ति पर ही आरोप मढ़ते हुए उन्होंने उसे धमकाने की कोशिश की।ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, धौरहरा कस्बे से लिंक पी बी मार्ग पर स्थित बसंतापुर निगम मैरिज हाल के सामने करीब 6 बीघा भूमि पर अवैध रूप से मिट्टी पटाई का खेल बेखौफ तरीके से चल रहा है। खनन माफिया ट्रैक्टर-ट्रॉली से मिट्टी ढो रहे हैं, और प्रशासन मौन बना हुआ है।सूत्रों का यह भी दावा है कि इस अवैध कारोबार में पुलिस को भी हिस्सेदारी दी जाती है, तभी खनन माफिया बिना डर के काम कर रहे हैं। एक ट्रैक्टर चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस और खनन ठेकेदार की जुगलबंदी से ये अवैध खनन चलता है।सूत्रों के मुताबिक इस मामले में धौरहरा में एक कथित पत्रकार की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जो खनन ठेकेदार और पुलिस के बीच सेतु का काम कर रहा है। ये पत्रकार खनन से जुड़े कई मामलों को दबाने का कार्य करता है।यह पूरा घटनाक्रम खीरी की तेज तर्रार जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल की छवि पर भी सवाल खड़े करता है, जिनकी प्रशासनिक सख्ती के लिए पहचान है। वहीं, पुलिस कप्तान संकल्प शर्मा की ईमानदार छवि को भी इस तरह की घटनाएं धूमिल कर रही हैं, क्योंकि उनके ही अधीनस्थ अधिकारी ऐसे गंभीर मामलों में संदिग्ध भूमिका निभा रहे हैं।बड़ा सवाल सरकार द्वारा खनन पर सख्ती और राजस्व के संरक्षण की बात बार-बार दोहराई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर वर्ष लाखों रुपए का राजस्व निजी जेबों में चला जाता है,और जिम्मेदार अधिकारी मौन रहकर इस खेल में सहभागी बनते जा रहे हैं। प्रशासन को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

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