प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा के होली मिलन समारोह में कवियों ने बांधा समां

लखीमपुर खीरी , 128

लखीमपुर खीरी। शहर के शिव कॉलोनी स्थित प्रगतिशील ब्राह्मण धर्मशाला में शनिवार को होली मिलन समारोह का आयोजन हुआ। प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा के तत्वाधान में आयोजित समारोह में कवि अनिल 'अमल', राजेंद्र प्रसाद तिवारी 'कंटक', कमलेश धुरंधर, कमल पांडे ने अपनी रचनाओं से लोगों को वाह वाह कहने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान उपस्थित सदर विधायक योगेश वर्मा और नगर पालिका अध्यक्ष लखीमपुर डॉक्टर ईरा श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से समाज में सकारात्मकता फैलती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता महासभा के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार नंदकुमार मिश्रा ने की। संचालन महामंत्री कुमुदेश शंकर शुक्ला व राजेश शुक्ला ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अधिवक्ता संघ के जिला अध्यक्ष कमल कांत दीक्षित सहित बलस्टर लाल पांडेय, प्रभाकर ब्रह्म मिश्रा, राजीव पांडे,  मथुरा प्रसाद, अन्नू तिवारी, अंकुर शुक्ला, राकेश मिश्र, के आर पांडे, राजेश शुक्ला, नवीन पांडे, राम नारायण मिश्र, अभिषेक अवस्थी आदि मौजूद रहे।
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 नशीले पदार्थों से बचाव ही है खुशहाल जीवन का आधार : डॉ अखिलेश शुक्ला
लखीमपुर खीरी । जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को जिला ग्राम्य विकाश संस्थान में नशा उन्मूलन कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें नशीले/मादक पदार्थों से बचाव के बारे में बताया गया। इस दौरान डॉ अखिलेश शुक्ला मनोचिकित्सक जिला चिकित्सालय द्वारा बताया गया कि नशा हम सब के लिए एक अभिशाप है, जो हमारे  समाज में आम है। मानव ही इस धरती पर सबसे बुद्धिमान और शक्तिशाली है और अपने जीवन को सुखद बनाने के लिए हर संभव कोशिश करता है लेकिन अच्छी शिक्षा के अभाव में लोग कम उम्र में ही नशा जैसे अन्य शारीरिक परिणामों का शिकार हो जाते हैं और आजीवन नशे की लत में रहते हैं। एक अध्ययन से पता चला कि 35 प्रतिशत भारतीय किसी न किसी तरह की नशा करते हैं। इनमें 20% से अधिक महिलायें और 47% पुरुष हैं। 
नशा से होने वाली बीमारियाँ
नशे से होने वाली बीमारियाँ का विशेषज्ञों का मानना है कि तम्बाकू का सेवन करने वाले लोगों की आयु कम होती है, क्योंकि यह दांतों, आंखों, मुहों और फेफडों पर बुरा असर डालता है. तम्बाकू का सेवन मुह से किया जाता है, इसलिए यह पहले मुह पर असर डालता है, जहां मुह का कैंसर और दांत गिरना जैसी गंभीर बीमारियाँ होती हैं। तम्बाकू में पाया जाने वाला निकोटिन रक्तचाप को बढ़ाता है, जो सांस लेने में कठिनाई, चक्कर आना और कमजोरी जैसी बीमारियाँ पैदा करता है। अर्थात् नशा हमारे लिए पूरी तरह से घातक है। सभी को नशा करना हानिकारक है। यह सभी को प्रभावित कर सकता है, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री। लेकिन नशा महिलाओं का पूरा जीवन बर्बाद कर सकता है नशा मुक्त महिलाओं की तुलना में नशा से ग्रस्त  महिलाओं की "गर्भपात दर" 15 फिसदी अधिक होती है। महिलाओं में दिल का दौरा, फेफडो कैंसर, सांस की बीमारी, निमोनिया, माहवारी की समस्याएं और प्रजनन संबंधी बीमारियाँ होती हैं अगर वे इसे खाते हैं। जो उनका पूरा जीवन खराब कर सकता है। 
तंबाकू के प्रयोग से होने वाले बीमारियां
तम्बाकू उत्पादों में लगभग पांच हजार से  भी ज्यादा जहरीले पदार्थ पाए जाते हैं, इनमें सबसे ज्यादा हानिकारक निकोटीन, टार और कार्बन मोनोआक्साइड हैं, जो निम्नलिखित बीमारियों को जन्म देते हैं।
फेफडो का कैंसर,दिमाग से सम्बंधी बीमारियां ,दिल का दौरा,मुह का कैंसर,दांत का खराब होना,पैरो की नशो में रुकावट,इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, लिवर का कैंसर,डायबिटीज का खतरा/अनियंत्रण,हृदय का रोग,कोलन का‌ कैंसर,आंत्र मे सूजन,स्तंभदोष,गुर्दों की क्षति,नेत्र रोग ऐसे में अगर आप बतायी गयी बीमारियों को जानते हुए भी नशा करते हैं, तो आप स्वयं से जिम्मेदार हैं, लेकिन आपके साथ-साथ आपके परिवार (मता-पिता, पत्नी, पुत्र-पुत्री आदि) को भी इसका भुगतान करना होगा। अगर आप अपने परिवार और रिश्तों से प्यार करते हैं, तो शराब पीना और नशा करना छोड़ दें और इसके बारे में दूसरों को भी बताएं। ताकि आपका समाज, रिश्ते-नाते और परिवार नशे से मुक्त हो सके।
मादक पदार्थ -भारत में  कई मादक पदार्थ हैं, जिनमें से कुछ प्राकृतिक है तो कुछ मानव निर्मित। मानव निर्मित मादक  पदार्थ जैसे सिगरेट, तम्बाकू, हुक्का आदि होते हैं और प्राकृतिक रूप से प्राप्त  मादक  पदार्थ जैसे गाजा, भाग, धतूर, सूर्ती आदि होते हैं। 
तम्बाकू निम्नलिखित रुपों में या तरीकों से खाया या पीया  जाता है।
सिगरेट (धीरे-धीरे हत्या करता है),बिडी (भारत में आम है),तम्बाकू सूर्ती (भारत में अधिकांश गांवों में खाया जाता है),हुक्का (यह नशा शहर और गांव दोनों में आम है),गाजा (भारत के उत्तरी राज्यों में भी इसका प्रयोग अधिक होता है),शराब (शराब का विश्वव्यापी सेवन),भांग (ज्यादातर भारत के गांवों में),ई-सिगरेट
नशा से दूर रहने का तरीका या उपाय/ नशा के लत से कैसे बचे ? समाज को नशा से बचाने का सबसे बड़ी उपाय यह है कि उन्हें नशा से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया जाए, और यह कि नशा आपकी सेहत, पर्यावरण, आपके परिवार और आने वाली पीढी पर  कैसे बुरा असर डालता है। नशाखोरी महिलाओं को शिशु जन्म देने में भी परेशानी हो सकती है। महिलाओं का नशा करना बाझपन, समय से पहले जन्म, मृत शिशु का जन्म या गर्भस्राव जैसी कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है।
नशा को रोकने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए कानून और नियम।
साइकेट्रिक सोशल वर्कर अतुल कुमार पाण्डेय द्वारा बताया गया कि नशे को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई नियम बनाए हैं; अगर किसी को सार्वजनिक स्थान पर शराब पीते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाती है, मई 2003 को सरकार ने राष्ट्रिय तम्बाकू नियंत्रण कानून पारित किया है। कानून सभी तंबाकू पदार्थ पर लागू होगा। जैसे-गुटखा, सिगरेट, पान मसाला, खैनी, इत्यादि। 
 नशा रोकने  को रोकने  वाले धाराएं और कानून निम्नलिखित है।
धारा 4:-धूम्रपान करना सभी सार्वजनिक स्थानों (जैसे स्कूल, अस्पताल, होटल, रेलवे स्टेशन, सिनेमाघर, बस स्टैंड) पर गैरकानूनी है। धारा 5: किसी भी प्रकार का तम्बाकू उत्पादों का,आडियो, प्रिंट और विजुअल मीडिया के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है। धारा 6 (क) : धारा छह के तहत अठारह वर्ष से कम आयु के बच्चों को तंबाकू देना गैरकानूनी है। धारा 6 (ख) : आप इस धारा के तहत 100 गज या किसी भी शैक्षणिक संस्था के आसपास तम्बाकू नहीं बेच जा सकते हैं। सातवां खंड: सभी तम्बाकू उत्पादों पर इस धारा के तहत स्वास्थ्य चेतावनी का लेबल लगाना अनिवार्य है। धारा सात, या पांच: सभी तम्बाकू उत्पादों के पैकेट पर निकोटीन और टार सामग्री की अधिकतम सीमा होनी चाहिए। तथा पैकेट पर पूरी तरह से दिखाया जाना चाहिए। मनोचिकित्सक डॉ शुक्ला का कहना है कि नशा-मुक्त वातावरण बनाना, सहायता समूहों में भाग लेना और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की मदद लेना शामिल हो सकता है। व्यक्ति और परिवार मिलकर नशे के चक्र को तोड़ने में मुख्य भूमिका निभा सकता है। 
नशीली दवाओं की लत के बारे में खुलकर बात करना ।
इसका प्रभाव व्यक्ति और परिवार पर पड़ता है। ऐसे माहौल को बढ़ावा देकर जहां ईमानदारी से बातचीत हो सके, व्यक्ति और परिवार नशे के साथ आने वाली चुनौतियों और संघर्षों की बेहतर समझ हासिल कर सकते हैं। यह खुला संचार लत से जुड़े कलंक को तोड़ने में भी मदद कर सकता है, जिससे अधिक सहानुभूति की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, नशे की लत, इसके कारणों और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में स्वयं को शिक्षित करना महत्वपूर्ण है।  चिकित्सक, परामर्शदाता और नशा मुक्ति विशेषज्ञ जैसे लोगों के पास प्रभावी उपचार और मार्गदर्शन प्रदान करने की विशेषज्ञता और अनुभव है। वे व्यक्तियों को उनकी लत के अंतर्निहित कारणों की पहचान करने, मुकाबला करने की योजना बनाने में मदद कर सकते हैं। इस अवसर पर जिला ग्राम्य विकास संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे, साथ ही ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक, आंगनवाड़ी सहायिका, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित रही। 

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