सूदखोरों के चंगुल में फंसा शख्स!

लखीमपुर खीरी , 199

मितौली क्षेत्र में अब भी जिंदा हैं मदर इंडिया के सुक्खी लाला
आखिर "सुक्खी लाला" रुपी सूदखोरों का चुकता क्यों नहीं होता ब्याज!
10 से 20 फीसदी ब्याज पर दिया कर्ज, लेकिन उससे कहीं ज्यादा वसूल चुके सूदखोर फिर भी अभी भी रकम बाकी....

लखीमपुर-खीरी। दशकों बीत गए महबूब खान निर्देशित फिल्म 'मदर इंडिया' के सुखी लाला याद होंगे? या कहें 'सूदखोर सुखी लाला'! उधार लेने वाले की जिंदगी गुजर जाती, लेकिन सुखी लाला का ब्याज पूरा नहीं हो पाता। दशकों बीते लेकिन न तो लोग 1957 में बनी "मदर इंडिया" फिल्म को भूल पाए और न ही अहम किरदार "सुक्खी लाला" को.....सूदखोरों व साहूकारों के जुल्मों सितम को फिल्मी पर्दे पर बखूबी प्रस्तुत करने वाले "सुक्खी लाला" जैसे तमाम लोग जनपद लखीमपुर-खीरी के मितौली व कस्ता में आज भी जिंदा है। कर्ज और ब्याज को लेकर दिन-रात घरों में जाकर तगादा व ऐलानिया धमकियों की बानगी कस्ता कस्बा में देखने को मिली है। 
आखिर "सुक्खी लाला" रुपी सूदखोरों का चुकता नहीं होता ब्याज! 
जानकारी मुताबिक, मितौली थाना क्षेत्र के कस्बा कस्ता निवासी शख्स ने सूदखोर संजय मिश्रा, गप्पू टिकरिया,रामलोटन, जगतपाल, माधव सिंह, अनिल निवासी दानपुर, संजय तिवारी, प्रमोद, विनोद व अन्य सूदखोरों से कर्ज लेकर बड़ी मुसीबत मोल ले ली है। युवक की पत्नी ने रो-रोकर बताया कि मेरे पति का व्यवसाय अच्छा चल रहा था कुछ बसे भी थी हालांकि अभी भी एक बस की साझेदारी है कुछ लोगों ने मेरे पति के साथ में सट्टेबाजी खेला और हारने पर सूदखोरों से क्रमश 25,10,5,20,25,10,10 हजार ब्याज की दर से रकम ली और बदले में हफ्ता माहवारी मोटी रकम चुकता भी किया यहा तक सारी नकदी, जेवर बेचकर चुकता किया फिर भी सूदखोरों का बकाया हैं, साथ ही पैसा चुकता न करने पर उसे व पति को अंजाम भुगतने जैसा धमकाया भी जा रहा है। रोजाना मिल रही धमकियों से परेशान होकर गतदिनो पूर्व मेरे पति मुझे कमरे में बंद कर मारा पीटा और पति कमरे में फांसी लगाने का प्रयास किया यह कहते-कहते युवक की बेबस पत्नी पल्लू से मुंह छिपाकर फफक-फफक कर रोने लगी। 
अवैध तरीके से कर रहे ब्याज का धंधा!
जिले में दर्जनों लाइसेंसी साहूकार हैं, लेकिन अवैध रूप से यह धंधा करने वालों की संख्या सैकड़ों में है। जिनका सूदखोरी का धंधा बेरोकटोक चल रहा है। सूदखोरों के चंगुल में फंसने के बाद कम ही कर्जदार उनके जंजाल से बाहर आ पाते हैं ब्याज न चुकता करने में असमर्थता जताने वालों के साथ मार-पीट व गाली-गलौच करना सूदखोरों के लिए आम बात है। 
हथिया लेते हैं प्रॉपर्टीज!
सूदखोर रकम और ब्याज की वसूली के नाम पर कर्जदार को जमकर लुटते हैं। कई बार तो ब्याज इतना ज्यादा हो जाता है कि कर्जदार का जेवर, मकान, बाइक, प्लाट तक सूदखोर हथिया लेते हैं।
शिकायत करने से कतराते हैं लोग
बेहद जरूरतमंद व्यक्ति ही सूदखोर से कर्ज लेता है। इसलिए उस पर कर्ज चुकाने का दबाव रहता है। कर्जदार तो पूरी रकम चुकाना चाहता है, लेकिन ब्याज की रकम ही इतनी ज्यादा होती है कि उसकी कमाई इसे चुकाने में ही चली जाती है। सिर पर कर्ज होने की वजह से वह पुलिस प्रशासन से शिकायत करने का जोखिम उठाने में कतराता है।

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