शिक्षा के बजाय जंग का मैदान बन रहे प्राथमिक विद्यालय

लखीमपुर खीरी , 101

हरीशंकर मिश्र

 

लखीमपुर खीरी। बेसिक शिक्षा विभाग में इन दिनों पढ़ाई के नाम पर तो शिक्षक कुछ नहीं करते हैं परंतु अपने अधीनस्थ शिक्षा मित्रों आदि को परेशान करने में माहिर हैं। 

मिली जानकारी के अनुसार ऐसा ही एक मामला ब्लॉक फूलबेहड़ के उच्च प्राथमिक विद्यालय रेहुआ में इन दिनों अखबारों की सुर्खियां बनने को तैयार है जहां एक सहायक अध्यापक बलवीर सिंह यादव अपने आप को शिक्षा विभाग का कर्मठ एवं ईमानदार शिक्षक  बताने में कभी नहीं चूकता है परंतु लोग बताते हैं कि इनकी सोच बड़ी घटिया किस्म की है जिसके चलते आरोप है कि इन्होंने स्कूल की एक महिला शिक्षामित्र को आए दिन ताना सुनाते रहते हैं कि तुम लोगों को सरकार बंधुआ मजदूर समझती हैं इस तरीके से अध्यापक बलबीर सिंह कई बार महिला शिक्षक को कम वेतन पाने पर ताना सुनाते थे जिससे परेशान महिला शिक्षामित्र ने इनकी शिकायत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक खीरी से की।  बताया जाता है कि तब शिक्षक बलबीर सिंह यादव ने अपने बचाव में एक प्रार्थना पत्र अधिकारियों को दिया है जिसमें उन्होंने अपने को लाचार एवं कमजोर होने का दावा किया है और कहा है कि महिला शिक्षामित्र मुझे परेशान कर रही है। इस संबंध में संवाददाता ने विद्यालय के प्रधान अध्यापक अजय वर्मा से फोन पर वार्ता की तो उन्होंने बताया है कि शिक्षामित्र की दिमाग की हालत ठीक ना होने के कारण हमारे सहायक अध्यापक की छवि धूमल कर रही है। अब विद्यालयों में अध्यापक आपस में झगड़ा करते रहेंगे तो यहां के छात्र कैसे पढ़ेंगे बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर सब कुछ जानते हुए अपने को अनजान बनते हुए तमाशा देख रहे हैं जिससे स्कूली बच्चों पर झगड़े का बुरा असर पड़ सकता है जबकि न्याय पंचायत स्तर पर स्कूलों की देखरेख हेतु एक नोडल शिक्षक की तैनाती है परंतु इस प्रकरण में वह भी मामले पर पर्दा डाल रहे हैं। इस विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय वर्मा जो  शिक्षक संगठन के मंत्री भी हैं यह कई बार शिक्षकों को समझा चुके हैं परंतु विद्यालय मे आपस के झगड़े को शांत नहीं कर पा रहे हैं। स्कूल के बच्चे पढ़ेंगे या ऐसे गुरुओं से झगड़ा करने का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। ऐसा प्रतीत होता है कि बेसिक शिक्षा विभाग को रसातल में ले जाने के लिए  विभाग के अफसर कर्मचारी सभी तैयार हैं। शायद इन्हें बच्चों की शिक्षा से कोई लेना देना नहीं है।

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