“तत्त्वज्ञानदाता सदगुरु रूप भगवान की पहचान:

लखीमपुर खीरी , 525

“भगवत् कृपा ही केवलम्”
                          
महाकुंभ नगर प्रयागराज/लखीमपुर।
                                     सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में महाकुंभ मेला हरिश्चंद्र चौराहा स्थित शिविर में सत्संग सुनाते हुए महात्मा दीपक दास ने कहा, तत्त्वज्ञानदाता सदगुरु एक पूरे युग में एक ही शरीर होती है जिन्हें भगवदावतार कहते हैं तथा ऋषि, महर्षि, ब्रह्मऋषि, आध्यात्मिक गुरु आदि अनेकानेक होते है। आगे महात्मा जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि पूरे सतयुग में ऋषि महर्षि ब्रह्मऋषि योगियों आदि की भरमार थी परन्तु तत्त्वज्ञानदाता सदगुरु रूप भगवान एक ही थे और वह थे भगवान श्री विष्णु जी महाराज, ठीक उसी प्रकार त्रेतायुग में भी ऋषि महर्षि ब्रह्मऋषि अनेकानेक थे परन्तु तत्त्वज्ञानदाता सदगुरु रूप भगवान एक ही थे – भगवान श्री रामचन्द्र जी महाराज, ठीक उसी प्रकार द्वापरयुग में भी ऋषि महर्षि ब्रह्मऋषि अनेकानेक थे परन्तु तत्त्वज्ञानदाता सदगुरु रूप भगवान एक ही थे – भगवान श्री कृष्णचन्द्र जी महाराज, आगे महात्मा जी ने कहा कि जब तीन युग  में तत्त्वज्ञानदाता सदगुरु रूप भगवान एक ही थे, तब वर्तमान में अनेकानेक कैसे हो सकते हैं । इसका अर्थ यह हुआ कि तथाकथित बनने वाले इस समय के सदगुरुओं में असल तत्त्वज्ञानदाता सदगुरु एक ही होगा और वह कौन है तथा उसकी पहचान किस प्रकार की जाए इसको जानने के लिए द्वापर युग के सद्गुरु भगवान श्रीकृष्ण के मुख से कहे गए सद्ग्रन्थ भगवद गीता से प्रमाण प्रस्तुत करते हुए अध्याय 7 श्लोक 29 को जनमानस में दिखाते हुए महात्मा जी कहते हैं। 


जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये।

ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम्‌॥

               जो मेरे शरण होकर जरा और मरण से छूटने के लिए यत्न करते हैं, वे पुरुष उस ब्रह्म को, सम्पूर्ण अध्यात्म को, सम्पूर्ण कर्म को जानते है॥ 

यह श्लोक अपने आप में इतना प्रभावशाली है क्योंकि यह तत्त्वदर्शी सत्पुरुष की पहचान का फॉर्मूला बताता है कि जो भी तत्त्वज्ञानदाता सदगुरु होगा उसके पास सम्पूर्ण ज्ञान होगा, जैसा कि गीता का यह श्लोक कहता है सम्पूर्ण ज्ञान तीन भागों में विभाजित है – कर्मकाण्ड, अध्यात्म और तत्त्वज्ञान । पूरी धरती पर एक भी धर्मोंपदेशक के पास इन तीनों विभागों की पृथक-पृथक सम्पूर्ण जानकारी नहीं है। वह या तो कर्मकाण्ड की जानकारी देंगे अथवा अध्यात्म की जानकारी देंगे परन्तु एकमात्र तत्त्वज्ञानदाता सदगुरु रूप भगवान ही हैं जिनके पास ही इन तीनों विभागों का सम्पूर्ण ज्ञान होता है। जिसकी व्याख्या अगले सत्र में होगी और ऐसा कहते हुए आज का सत्संग विराम लिया।

Related Articles

Comments

Back to Top