बस मालिकों की तानाशाही से परिचालक परेशान

लखीमपुर खीरी , 173

हरीशंकर मिश्र/के0के0 शुक्ला

लखीमपुर खीरी। भीरा पलिया बस यूनियन के द्वारा अपने चालक एवं परिचालकों को वेतन के नाम पर आजकल के इस महंगे समय में भी प्रति माह ₹1000 दिया जाता है। बस मालिक श्रम विभाग के अफसर से मिलकर अपने कर्मचारियों का जमकर शोषण उत्पीड़न करते हैं जरा सी बात पर चालक परिचालक को बस से हटा देते हैं इनके प्रतिदिन की मजदूरी ₹35 ही पड़ती है तथा उनकी समस्या कोई सुनने वाला नहीं है मालिक जब चालक परिचालक को नौकरी देते हैं तब वह उनका डीएल रख लेते हैं तथा चालक परिचालक को नियुक्ति का कोई भी प्रमाण नहीं देते हैं इनके साथ मनमाना रवैया अपनाते रहते हैं जानकारी के अनुसार दिनांक 22 जनवरी सन 2025 शाम 6:00 बजे लखीमपुर से पलिया के लिए बस चली थी जिसका नंबर अप 31 - 8487 है उसके परिचालक ने इस संवाददाता को बताया कि हम लोगों का भविष्य अंधकार में है हम लोगों को ₹1000 रुपए माहवारी वेतन मालिकों द्वारा दिया जाता है ऐसे में हम लोगों का परिवार किस तरीके से गुजर बसर करें। इसीलिए परिवार की गुजर बसर करने के लिए हम लोगों को चोरी का सहारा लेना पड़ता है इसलिए बस मलिक हम लोगों पर चोरी का भी आरोप लगाते हैं लेकिन ज्यादा से ज्यादा हम प्रतिदिन ₹600 ही लेते हैं जिसमें  ₹200 चालक को तथा ₹200 रुपए क्लीनर को भी देते हैं ₹200 अपने पास रखते हैं, इसी में हम लोग दोनों टाइम का भोजन एवं खाली चाय पी करके अपना गुजारा करते हैं। परिचालक ने यह भी बताया कि कई परिचालकों तथा चालकों का वेतन मालिकों पर पड़ा है परंतु वेतन देने का नाम नहीं ले रहे हैं तथा जगह-जगह चेक पोस्ट बना रखा है हम लोग जब चेक पोस्ट पर बस रुकते हैं तब तब हमें मैनेजर को भी नजराना देना पड़ता है जरा सी बात पर कर्मचारियों को बगैर नोटिस ब्लैक लिस्ट कर दिया जाता है कम से कम 1 साल तक बिठा रखते हैं इतनी महंगाई के चलते हम लोगों का भरपूर शोषण मोटर मालिकान करते हैं इतनी बड़ी यूनियन में हम लोगों की सुनने वाला कोई नहीं है। यहां तक सरकारी अमला भी केवल मोटर मालकनो के हित के लिए काम करता है।

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