आज सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार धर्म क्षेत्र में _कमल जी

लखीमपुर खीरी , 417

अद्भुत सत्संग, भजन-कीर्तन एवं आत्मा – ईश्वर – ब्रह्म का साक्षात् दर्शन कार्यक्रम होगा
सदानंद तत्व ज्ञान परिषद का शिविर बुधवार से महाकुम्भ में शुरू 
1 फरवरी को निकलेगी शोभा यात्रा
प्रयागराज/लखीमपुर।
सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में 8 जनवरी से 10 फरवरी तक महाकुंभ मेला प्लॉट नंबर 22 सेक्टर 18 हरिश्चंद्र चौराहा, लोअर संगम मार्ग में धर्म -धर्मात्मा-धरती रक्षार्थ सत्य-धर्म-न्याय-नीति संस्थापनार्थ सत्संग एवं भजन कीर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, 1 फरवरी को सत्य-धर्म संस्थापनार्थ धर्म-धर्मात्मा-धरती रक्षार्थ भगवान श्री विष्णु जी-श्री राम जी-श्री कृष्ण जी-सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस जी के तत्त्वज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने तथा जनमानस को धर्म के नाम पर फैले आडम्बर-ढोंग-पाखंड से बचाने हेतु भगवद शोभा यात्रा निकाली जाएगी। 
               संस्था के कमल जी ने कहा आज अगर सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार किसी क्षेत्र में है तो वह धर्म क्षेत्र में ही है । क्योंकि भगवान् एक था एक है एक ही रहने वाला परम सत्ता शक्ति है जो दो भी नहीं होता परन्तु आज हर महत्वाकांक्षी गुरु जी लोग सद्गुरु, जगतगुरु, श्री श्री श्री 108 श्री अनंत श्री आदि आदि पदवी ले लेकर अपने शिष्यों में भगवान् बन रहे हैं और उनके धन और धर्म भाव का शोषण कर रहे हैं , जब की ये गुरु जी लोग शरीर में रहने वाले चेतन जीव को भी नहीं जानते और न परमात्मा को ही जानते हैं , नाजानकारी में आत्मा को ही जीव और आत्मा को ही परमात्मा घोषित करने कराने में लगे हैं, जबकि हर मामला में तीनों तीन अलग अलग हैं। तीनों का नाम-रूप-गुण-लक्षण-प्रभाव-उपलब्धि-विधान सब अलग अलग है।
             महात्मा दशरथ जी ने कहा, भगवान विष्णु-राम-कृष्णजी ने जिस ‘तत्त्वज्ञान’ को अपने समर्पित-शरणागत भक्त-सेवकों को देकर परमेश्वर के जिस विराटरूप का साक्षात् दर्शन कराया था, आज सन्त ज्ञानेश्वर जी ने अपने भक्त-सेवकों को उसी तत्त्वज्ञान को ही देकर जीव-आत्मा-परमात्मा का आमने-सामने बातचित के साथ साक्षात दर्शन कराया है । महात्मा जी ने आगे कहा की उस तत्त्वज्ञान में यह स्पष्ट दिखलाई दिया की श्री विष्णु-राम-कृष्ण के शरीर में अवतरित हो कर जिस परमतत्त्वम ने कार्य किया था , आज सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस के शरीर में अवतरित होकर  उसी परमात्मा परमेश्वर परमतत्त्वम ने धर्म संस्थापन का कार्य किया है । अगर कोई जांच करना चाहता है तो इस संस्था में उक्त जांच का भी प्रावधान है  |
 महात्मा जी ने आगे कहा कि इस संस्था का एकमात्र उद्देश्य धर्म-धर्मात्मा-धरती की रक्षा ही है । असत्य-अधर्म-अन्याय-अनीति को समूल समाप्त कर सत्य-धर्म-न्याय-नीति को समाज में लागू करने हेतु सन्त ज्ञानेश्वर जी के सकल शिष्य समाज संकल्पित एवं समर्पित हैं।

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