ट्रांसफार्मर की खराबी से लोगों के उपकरण फुंके विद्युत सप्लाई की दिक्कत झेल रहे उपभोक्ता दर्जनों बार रोजाना कटती जुड़ती है लाइट
लखीमपुर खीरी Aug 01, 2021 at 08:12 PM , 380शाम 4 बजे करीब बहाल हुई सप्लाई
लखीमपुर खीरी। नगर के इमली चैराहा स्थित विद्युत विभाग के ट्रांसफार्मर में गड़बड़ी आ जाने के कारण उपभोक्ताओं की जान सांसत में है जानकारी के अनुसार इमली चैराहा स्थित बिजली विभाग का ट्रांसफार्मर शनिवार की शाम से गड़बड़ा गया जिस कारण उपभोक्ताओं को वोल्टेज की प्रॉब्लम पैदा हो गई इलाके में वोल्टेज का आलम यह हो गया कि कभी 50 60 हो जाता है तो कहीं 330 सौ तक पहुंच जाता है जिस कारण ट्रांसफार्मर से मिले कनेक्शन के लोगों को तमाम उपकरण क्रिया हीन हो गए। रोजाना दिन में दर्जनों बार बिजली की आवाजाही से त्रस्त उपभोक्ताओं ने इस समस्या की भी जानकारी पावर हाउस पर दी लेकिन बिजली विभाग के लोगों ने जैसे-तैसे सही किया परंतु सही करने के बाद भी वह सही नहीं हो पाया जिसके चलते उपभोक्ताओं की समस्याएं निरंतर बनी रही जिससे लोगों के सामने इस भीषण गर्मी में बिजली के साथ-साथ जल संकट भी पैदा हो गया। आखिरकार बिजली विभाग के लोगों ने ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया शुरू कर शाम करीब 4 बजे सप्लाई बहाल की तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।
प्रशासनिक भवन का लोकार्पण
लखीमपुर-खीरी। गत दिवस कृषि विज्ञान केन्द्र, जमुनाबाद के प्रशासनिक भवन गोला गोकर्णनाथ का लोकार्पण वर्चुअल के माध्यम से राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल जी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम को श्रीमती आनन्दीबेन पटेल कुलाधिपति एवं राज्यपाल, उत्तर प्रदेश जी ने कार्यक्रम को सम्बोधित किया एवं विशिष्ट अतिथि अजय मिश्र ‘टेनी’ सांसद लखीमपुर-खीरी एवं गृहराज्य मंत्री भारत सरकार एवं लाखन सिंह राजपूत कृषि, कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री ने सम्बोधित किया। इस कार्यक्रम में सूर्य प्रताप शाही मंत्री, कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान भी उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथि अजय मिश्र ‘टेनी’ सांसद लखीमपुर-खीरी एवं गृहराज्य मंत्री भारत सरकार जी ने सम्बोधन कर बताया कि इस कृषि विज्ञान केन्द्र लखीमपुर-खीरी प्रदेश के मध्य मैदानी क्षेत्र में स्थापित है। यह चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर द्वारा संचालित है। कृषि विज्ञान केन्द्र, जमुनाबाद अपने उद्देश्यों को पूरा करते हुए जिले में प्रतिवर्ष 6000 कृषकों को प्रसार की विभिन्न गतिविधियों द्वारा लाभान्वित करता है। केन्द्र द्वारा कृषकों की आयवर्धन एवं रोजगार सृजन हेतु गन्ने के साथ सहफसली खेती को लगभग 2500 हेक्टेयर में आच्छांदित कराया गया है। जिससे 2000 से अधिक किसान लाभांवित हुए है। गन्ने का उत्पादन बढ़ाने हेतु ट्रेंच बुआई विधि के 69 प्रदर्शन आयोजित कराए गए। परिणामस्वरूप इस तकनीक का 1125 हेक्टेयर क्षेत्र में कृषक प्रक्षेत्रों पर आच्छादन हो चुका है। केला का उत्पादन बढ़ाने हेतु सहफसली खेती (बैंगन एवं मिर्च) के साथ ही ळ.9 के टीशू कल्चर द्वारा संवर्धित पौधों का भी 1337 हेक्टेयर में रोपण कराया गया है। लखीमपुर-खीरी के किसान केले के सूडो तना से फाइबर बना रहे है। जो हर्ष का विषय है। प्रदर्शनों के माध्यम से विभिन्न फसलों की उन्नति प्रजातियों जैसे गेहूं की उन्नतिशील प्रजातियां (शताब्दी, माही, एन0डब्लू0 2026) मसूर प्रजाति (के0ए0एस0-218, के0एल0एस0-9-3) एवं राई की प्रजाति पीताम्बरी का कृषक प्रक्षेत्रों का समावेश किया गया है। जिससे फसलों की उत्पादकता में 10-12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्नत तकनीक अपनाने वाले बहुत से प्रगतिशील कृषकों उदारहरणार्थ - श्री शैलेन्द्र सिंह, श्री यदुनन्दन पुजारी बांकेगंज, श्री सुभ्रान्त धौरहरा, श्री अनुज कुमार, श्री सोबरन लाल, श्री अशोक वर्मा, श्री दिलजेन्द्र सिंह, श्री आलोक शुक्ला को प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार से नवाजा गया है।






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