*नगर में प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी गड़बड़ी की आशंका पात्रों के स्थान पर अपात्र लोगों की भरमार।*

लखीमपुर खीरी , 22

पलिया कला खीरी भारत सरकार की सभी गरीबों को आवास उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना "प्रधानमंत्री आवास योजना" सरकारी मशीनरी के भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गई है। शहरों में मकान बनवाने के लिए 2लाख50हजार रु जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 2लाखरु आवास के नाम पर पात्र व्यक्ति को उपलब्ध कराए जाते हैं जो कि तीन किस्तों में दिए जाते हैं।
पात्र गरीबों को आवास उपलब्ध होने की संख्या निरंतर कम होती जा रही है उनके स्थान पर संपन्न दो मंजिलें -तीन मंजिल वाले मकानों के स्वामी, अच्छा बड़ा व्यापार करने वाले व्यापारी, कृषि भूमि के स्वामी कारो द्वारा चलने वाले लोग भी इस सरकारी योजना का लाभ उठाकर अपने खाली पड़े प्लाटों पर मकान बनवा रहे हैं और उन मकानों को किराए पर उठाकर धन उपार्जन कर रहे हैं। ऐसे लोग  प्रशासन के भ्रष्ट कर्मचारियों और दलालों के माध्यम से  पीएम आवास निधि का भरपूर लाभ उठा रहे हैं। 
आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर लोगों द्वारा समय-समय पर शिकायतें की जाती रही है समाचार पत्रों में भी इस योजना में भ्रष्टाचार के समाचार प्रकाशित होते रहे हैं। लेकिन उच्च स्तर पर बैठे अधिकारियों ने इस योजना में शामिल किए गए पात्र -अपात्र  व्यक्तियों के सत्यापन करने की आवश्यकता नहीं समझी। लेकिन उच्च स्तर पर बैठे अधिकारी अपनी आंखें बंद किए रहते है आरोप है कि योजना के वास्तविक पात्र परिवारों को लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि  अनेकों अपात्र लोग  प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उठा रहे हैं। 
         ‌यदि भौतिक रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभ उठाने वालो का सत्यापन किया जाए  तो एक दो नहीं बल्कि दर्जनों की संख्या में ऐसे लोग मिलेंगे जिनकी वार्षिक आय  लाखों रुपए की है और करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। और प्रधानमंत्री आवास योजना की निधि से अपने आवास बनवा चुके हैं। कई अपात्र  तो एक नहीं दो दो प्रधानमंत्री आवास प्राप्त कर चुके हैं।
        ‌ ‌‌प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्रामीण क्षेत्रों की  स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं कहीं जा सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ मामलों में लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता नहीं बरती गई। प्रधान लोग अपने करीबी लोगों को इस योजना का लाभ दिलाने में अधिक रुचि रखते हैं। वह चाहे पात्र हो या अपात्र।
 कुछ लोगों ने अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं द्वारा संबंधित विभाग से लाभार्थियों की सूची, आवास निर्माण की स्थिति और जारी की गई किस्तों का सत्यापन कराने भी की मांग की है। उनका कहना है कि जांच होने पर अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

Related Articles

Comments

Back to Top