जान जोखिम में डाल कर मोर्चा संभाले हैं डाक्टर
लखीमपुर खीरी May 29, 2021 at 08:32 PM , 127पलियाकलां-खीरी। सेवा सुरक्षा बंधुत्व को प्राथमिकता देने वाले पलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात अनुभवी चिकित्सक डॉक्टर अजीत सिंह गरीब शोषित वंचित पीड़ित मरीजों के लिए कोरोना काल में मसीहा बन गए है। जिसके फलस्वरूप तहसील क्षेत्र के अंतर्गत दूर दराज के शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों का सैलाब उमड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि वैश्विक महामारी के खौफ के चलते जहां खीरी जिले के प्राइवेट व सरकारी डॉक्टर अपने कर्तव्यों से विमुख होकर भूमिगत हो गए हैं वही पलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर अजीत सिंह ने अपने कर्त्तव्यों को प्राथमिकता देते हुए पीड़ित मरीजों को जीवन दान देने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल कर बीमारियों से लड़ने के लिये मोर्चा संभाले हुए हैं। नर सेवा नारायण सेवा को साक्षी मानकर मानव सेवा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले डॉक्टर सिंह पीड़ित मरीजों को चैबिस घंटे सेवा देकर दर्जनों परिवार के लिए अंधेरी रात में उजाला बन कर उभरे हैं जिसका ताजा उदाहरण है कि गत दिवस बुधवार अर्धरात्रि को नगर के मोहल्ला अहिरान की रीना गुप्ता(खड़का) की अचानक तबियत खराब हो गई जिसे नगर के सभी प्रतिष्ठित चिकित्सकों ने कोरोना निगेटिव रिपोर्ट मांगने का हवाला देते हुए इलाज करने से इनकार करते हुए बाहर ले जाने की सलाह दी। जिसे सुनकर गरीब पीड़ित परिजनों की आँखों के आगे अंधेरा छा गया तभी पड़ोस एक सज्जन ने उस गरीब परिवार को हौसला अफजाई करते हुए डॉक्टर अजीत सिंह का हवाला देते हुए उम्मीद की एक किरण जगाई तथा डॉक्टर अजीत सिंह के आवास पर लाकर पीड़ित परिवार की माली हालत बताते हुए उपचार के लिये आग्रह किया। डॉक्टर सिंह पड़ोसी सज्जन का आभार प्रकट करते हुए पीड़ित मरीज का बिना बिलंब किये निःशुल्क उपचार शुरू कर दिया और गंभीर बीमारी से पीड़ित महिला को नया जीवन दान दिया जिससे भावविभोर होकर पीड़ित परिजनों ने डॉक्टर अजीत सिंह को कोटि कोटि आभार प्रकट किया।
शिक्षकों के साथ उनके परिवार को भी लगे टीका
लखीमपुर खीरी। उत्तरप्रदेशीय प्रार्थमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजीव त्रिपाठी ने शिक्षकों को प्रार्थमिकता के तौर पर टीका लगाने के शासन के निर्णय का स्वागत किया है। संजीव ने बताया कि बीएसए कार्यालय में कैम्प लगा कर कोविड निरोधक टीका लगेगा। संजीव ने मांग की है कि शिक्षक के साथ उनके परिजनों का भी टीकाकरण हो।






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