महामारी को फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे

लखीमपुर खीरी , 187

लखीमपुर खीरी। एक तरफ जहां सरकार कह रही है कि जो जहां है वही रूके और वही उत्तर प्रदेश सरकार को धता बता रहे हैं। लखीमपुर खीरी के प्राइवेट बस चालक वही मामला भीरा पलिया मार्ग पर स्थित मझौरा चैराहे पर सूत्रों की माने तो दर्जनों बस रोजाना दिल्ली देहरादून तेलंगाना आंध्र प्रदेश के लिए रवाना होती हैं बसें और वही से वापसी होकर भीरा पलिया लोकल क्षेत्र की सवारियों को लाकर भीरा चैराहे व पलिया चैराहे पर छोड़ देते हैं आने वाले लोग अपने-अपने क्षेत्रों में खुलेआम सड़कों पर घूम रहे हैं जिससे लोगों को संक्रमित होने का खतरा बढ़ रहा है और साथ ही लॉकडाउन का उल्लंघन किया जा रहा है। जहां इस वैश्विक महामारी के कारण पूरी मानवजाति त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है तो वहीं कुछ अपने ही इस महामारी को फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अभी तक हम सभी पलिया निवासी काफी हद तक इस महामारी से अपने पलिया को सुरक्षित किये हुए हैं। तो वहीं दूसरी ओर पलिया बस यूनियन व कुछ सवारी दलाल अपने पैसों के लालच में शहर में इस बीमारी को आने के लिए खुला आमंत्रण दे रहे हैं। मुम्बई, बैंगलोर, सूरत, पूना आदि महानगरों से जो कि इस बीमारी के केंद्र माने जाते हैं नेपाली नागरिक वहां से सीधे बस गौरीफंटा तक रिजर्व करके लाते हैं लेकिन अपनी गुंडई के दम पर व कुछ पैसों के लालच में पलिया बस यूनियन वाले उन बाहरी रिजर्व बसों को जबरजस्ती बोझवा के पास ढावों पर रोककर सवारियों को उतार लेते हैं फिर वहां से लोकल वाहनों द्वारा उन बाहरी सवारियों को पलिया लाते हैं और फिर अपनी बसों द्वारा ही उन सवारियों को गौरीफंटा भेजते हैं। इसी कारण यह सभी बाहरी लोग जो कि महामारीजनित शहरों से आते हैं और फिर यह लोग बोझवा ढावों से पलिया। पलिया से गौरीफंटा सभी लोकल वाहनों में चढ़ते उतरते हैं और पलिया में भी घूमते हैं। जबकि यदि इनकी रिजर्व निजी बसों को सीधे गौरीफंटा भेज दिया जाये तो हम सब एवं हमारा शहर काफी हदतक सुरक्षित रहेगा  लेकिन इससे बस व्यवसायियों का भारी घाटा हो जायेगा। अब देखिए चाहे कुछ भी या शहर जल जाये। लेकिन कोई अपना घाटा कैसे करेगा।जब यह सवारी ढाबों पर उतरती है तो इन्हीं लोगों के ढाबे पर सभी लोग खाना खाते हैं चाय, कोल्ड ड्रिंक, सिगरेट, गुटखा इत्यादि की जबरदस्त खरीददारी करते है। फिर बोझवा से पलिया इन्हीं सबकी टैक्सियां इन सवारियों को मोटे किराये पर पलिया लाती हैं। फिर पलिया से गौरीफंटा इन्हीं की बसें इन सवारियों को गौरीफंटा छोड़ती हैं सवारी किराया तो छोड़ दीजिये एक छोटे छोटे झोला का भी किराया पचास रुपये लिया जाता है।

 

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