निर्मल मंन जन जो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा, श्रीमद् भागवत कथा विश्राम पर सुनाया जरासंध वध, शिशुपाल उद्धार का प्रसंग,

लखीमपुर खीरी , 1

गोला गोकर्णनाथ खीरी,

पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के निकट छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष विजय वाजपेई के आवास पर हो रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम पर  कथा व्यास आचार्य गोविंदजी मिश्र ने जरासंध वध, शिशुपाल उद्धार का प्रसंग सुनाया।

सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर नैमिष धाम के आचार्य गोविंद मिश्र ने जरासंध वध के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि अधर्म और अत्याचार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में धर्म की ही विजय होती है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
उन्होंने सुनाया कि पांडवों द्वारा आयोजित राजसूय यज्ञ में जब सबसे पहले सम्मान के लिए भगवान श्रीकृष्ण को चुना गया, तो शिशुपाल ईर्ष्या से भर गया।
 शिशुपाल ने भरी सभा में सबके सामने श्रीकृष्ण को अपशब्द कहे और उनका लगातार अपमान करना शुरू किया। श्रीकृष्ण शांत रहकर उसके अपराध गिनते रहे।
जैसे ही शिशुपाल ने अपनी 101वीं गलती पूरी की, श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से भरी सभा में उसका सिर धड़ से अलग कर उसका उद्धार कर दिया। आचार्य ने कहा कि सात दिन तक सच्ची श्रद्धा और प्रेम से श्रीमद्भागवत कथा सुनने से उतना ही पुण्य मिलता है, जितना हजारों वर्षों तक  कठिन तपस्या करने से प्राप्त होता है।
मुख्य यजमान विजय वाजपेई, नीलम बाजपेई, अभिलेख, शिवांगी अभय बाजपेई, विधायक अमन गिरि, पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू, आशीष सिंह डब्बू, विनीत सिंह भदौरिया, मुख्य सेवादार सुबोध दीक्षित उर्फ प्रधान, रविंद्र कटियार, आरती सिंह भदौरिया, प्रियंका, निरंजना मिश्रा, प्रेमलता दीक्षित सहित तमाम भागवत कथा प्रेमी, श्रद्धालु मौजूद रहे।

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