जिला अस्पताल मोतीपुर ओयल बना अव्यवस्थाओं का केंद्र, भाकियू (सम्राट) ने आंदोलन की दी चेतावनी

लखीमपुर खीरी , 0

लखीमपुर खीरी।जनपद के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला चिकित्सालय मोतीपुर ओयल इस समय खुद गंभीर अव्यवस्थाओं की बीमारी से जूझ रहा है।प्रतिदिन हजारों की संख्या में इलाज कराने आ रहे मरीजों और तीमारदारों को यहाँ भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की इस बदहाली को लेकर भारतीय किसान यूनियन (सम्राट) अराजनैतिक ने मुख्यमंत्री,उपमुख्यमंत्री स्वास्थ्य मंत्री और जिलाधिकारी को एक 9 सूत्रीय मांग पत्र भेजकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर इन जनसमस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर सैकड़ों किसानों के साथ शांतिपूर्ण घेराव और प्रदर्शन किया जाएगा।भाकियू (सम्राट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (युवा मोर्चा) जितेंद्र सिंह यादव और जिला उपाध्यक्ष अमर पाल सिंह द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में अस्पताल की निम्नलिखित 9 मुख्य समस्याओं को उजागर किया गया है,अस्पताल में मरीजों और डॉक्टरों के आवागमन के लिए लगाई गई लिफ्ट पिछले करीब दो महीनों से पूरी तरह बंद है। इसके कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और डॉक्टरों को पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल तक जाने के लिए सीढ़ियों और रैंप का सहारा लेना पड़ रहा है,अस्पताल के पर्ची काउंटर, गैलरी और लैब की ओर जाने वाली गैलरी में बने महिला व दिव्यांग शौचालयों में अक्सर ताले लटके रहते हैं। इस वजह से महिला मरीजों को विवश होकर पुरुषों के शौचालय का उपयोग करना पड़ रहा है, जो अत्यंत असुविधाजनक और उनकी गरिमा के खिलाफ है।अस्पताल परिसर के चारों तरफ भारी गंदगी और पानी का भराव रहता है। अस्पताल कर्मचारियों के आवास के पास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं, जिससे वहां जहरीले जीव-जंतुओं और मच्छरों का खतरा बढ़ गया है,अस्पताल परिसर में कई भारी और सूखे पेड़ खड़े हैं, जो कभी भी गिरकर जान-माल की बड़ी हानि (जनहानि) कर सकते हैं। इसके लिए वन विभाग से समन्वय स्थापित कर इन्हें तुरंत कटवाने की मांग की गई है।अस्पताल के मुख्य गेट से लेकर मुख्य सड़क (मेन रोड) तक का मार्ग बेहद संकरा है। इसके दोनों तरफ अवैध रूप से ऑटो-रिक्शा खड़े रहते हैं, जिससे हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। इस जाम में अक्सर जीवनदायिनी एम्बुलेंस भी फंस जाती हैं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है।अस्पताल में बने नाले कूड़ा-करकट से पूरी तरह पट चुके हैं, जिससे गंदे पानी की निकासी ठप है। कई स्थानों पर नाले खुले हुए हैं, जिनमें गिरकर मरीज या उनके तीमारदार चोटिल हो रहे हैं। इन पर तुरंत आरसीसी स्लैब डलवाने की मांग की गई है।इमरजेंसी गेट के पास लगा वाटर कूलर/पानी का प्लांट लंबे समय से बंद पड़ा है, जिससे मरीजों को भीषण गर्मी और बीमारी के दौरान शुद्ध पेयजल भी नसीब नहीं हो पा रहा है।अस्पताल में आने वाले मरीजों को आवश्यक और बुनियादी दवाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवाइयां लिखी जा रही हैं, जिन्हें खरीदने में गरीब मरीज असमर्थ हैं।पत्र में जिला अस्पताल में ऑपरेशन कराने वाले मरीजों के परिजनों से कथित तौर पर अवैध वसूली किए जाने के गंभीर आरोप सर्जन डॉक्टरों पर लगाए गए हैं। संगठन ने मांग की है कि इन आरोपों की गोपनीय जांच कराई जाए। साथ ही, जनपद में 5 से 10 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर नए स्टाफ की तैनाती की जाए।भाकियू (सम्राट) ने प्रशासन को आगाह किया है कि जनहित और जनस्वास्थ्य को सर्वोपरि मानते हुए इन समस्याओं पर 15 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाए, अन्यथा किसान उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

Related Articles

Comments

Back to Top