बज़्म फ़रोगे अदब का 27वां तरही मुशायरा संम्पन्न

लखीमपुर खीरी , 0

...ऐसी ख़ुशबू मेरी ज़बान में है।

लखीमपुर खीरी। बज़्म फ़रोगे अदब की तरफ से 27वाँ तरही मुशायर कराया गया जसकी सदारत बज़्म के सदर आमिर रज़ा ने  और निज़ामत डॉ एहराज अरमान ने किया।
    मुशायरे का आगाज़ इमरान रज़ा बरकाती ने तिलावत-ए- कुरान के साथ किया और वहीद अहमद वाहिदी ने नातिया कलाम पेश किया। इसके बाद तरही मुशायरे का दौर चला जिसमे सबसे पहले आसिफ अंसारी अपना कलाम पेश करते हुए कहा-
हाथ में रोजगार कोई नहीं,
कितनी मायूसी नौजवान में है।
बज़्मे फ़रोगे अदब के सदर आमिर रज़ा ने कहा- 
जिसकी यादें बसी है सीने में,
उसकी उल्फत मेरे बयान में है
नफीस वारसी ने कहा कि -
बोल किसको तेरा बदल मानू,
कोई तुझसा भला जहान में है।
मुशायरे की निज़ामत कर रहे बज़्म के सिक्रेट्री डॉ एहराज अरमान ने कहा कि-
तुझको मालूम ही नहीं अरमान,
जिंदगी आन बान शान में है।
शाहबाज हैरत चिश्ती ने कहा-
कोई ऐसा भी इस जहान में है,
जो नज़र में जिगर में जान में है।
सैफुल इस्लाम ने कहा-
तीर उसके लिए कमान में है, 
वो परिंदा जो एक उड़ान में है।
अय्यूब अंसारी ने कहा- 
यह महक क्या कहीं जहां में है,
 जो महक लश्करी ज़बान में है।
इमरान रज़ा बरकाती ने कहा-
लुत्फ़ इतना किसी सदा में नहीं,
दोस्तों जो मजा अज़ान में है।
मंसूर महवर ने कुछ यूं कहा-
मुश्क अम्बर न तो लुबान में है,
ऐसी खुशबू मेरी ज़बान में है।
नदीम अहमद नदीम ने कुछ यूं पढा-
महकी महकी है जिससे वादिए जां,
ऐसा एक फूल दिल के लॉन में है।
वसीक रज़ा कुरेशी ने कहा-
ख़ोफ़े दुनियां नहीं है कुछ भी मुझे,
हक बयानी मेरे बयान में है।
 उमर हनीफ ने कहा -
झूठ पर झूठ बोलने वाले,
ज़हरे नफरत तेरे बयान में है।
हसन अंसारी ने कहा-
सारी दुनिया है मेरी शैदाई,
ऐसी खुशबू मेरी ज़बान में है।
इलियास चिश्ती का शेर कुछ यू पढ़ा गया-
इश्क के ऊंचे आसमान में है,
दिल परिंदा बना उड़ान में है।
मुशायरा देर रात कामयाबी के साथ मुकम्मल हुआ।

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