सिसैया खुर्द मामले में बड़ी कार्रवाई, 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड कोतवाल की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
लखीमपुर खीरी Sep 17, 2026 at 06:31 PM , 12लखीमपुर खीरी।उत्तर प्रदेश के जनपद खीरी के धौरहरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिसैया खुर्द में हुई एक विवादित घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और उदासीनता बरतने के आरोप में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक खीरी डॉ० ख्याति गर्ग के निर्देश पर प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए 05 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है।पुलिस महकमे में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए की गई इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है।
सस्पेंड किए गए पुलिसकर्मियों में दो मुख्य आरक्षी और तीन आरक्षी शामिल हैं,मुख्य आरक्षी विनोद कुमार,मुख्य आरक्षी अशोक तिवारी,आरक्षी मोहित,आरक्षी भारत शर्मा,आरक्षी विशाल है।मिली जानकारी के अनुसार, धौरहरा क्षेत्र के सिसैया खुर्द गांव में 14 सितंबर को एक गंभीर और विवादित घटना घटित हुई थी। इस प्रकरण में पुलिस ने मु०अ०सं० 433/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं 115(2), 352, 351(2), और 333 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है। इस मामले में कार्रवाई के दौरान तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा अपने दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही और उदासीनता बरतने की बात सामने आई थी। वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए निलंबन की यह कार्रवाई की है।मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन विभागीय जांच अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी), जनपद खीरी को सौंप दी गई है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बड़ा सवाल,छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई तो कोतवाल को 'अभय दान' क्यों
इस निलंबन की कार्रवाई के बाद जनता और स्थानीय हलकों में कई गंभीर सवाल तैरने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कार्रवाई की गाज केवल छोटे पुलिसकर्मियों पर ही क्यों गिरी,स्थानीय लोगों और जानकारों के बीच चर्चा है कि आखिर ये सिपाही किसके आदेश पर गांव पहुंचे थे, क्या सिपाही अपने मन से इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने या कार्रवाई करने चले गए थे,यदि सिपाहियों को वहां भेजा गया था, तो थाना प्रभारी (कोतवाल धौरहरा) की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई,क्या धौरहरा कोतवाल को इस पूरे मामले में अभय दान दे दिया गया है,जनता का मानना है कि पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होना बिल्कुल सही है, लेकिन निष्पक्षता का तकाजा यह कहता है कि आदेश देने वाले उच्च अधिकारी की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) की विभागीय जांच में इस पहलू को शामिल किया जाता है या नहीं।






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