हैदराबाद पुलिस की कार्यशैली पर सवालबड़ी घटना के बाद भी खामोश
लखीमपुर खीरी Sep 05, 2026 at 06:32 PM , 4हैदराबाद पुलिस सात दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, क्या मामले को दबाने की कोशिश
गोला गोकर्णनाथ खीरी:थाना हैदराबाद क्षेत्र के अंतर्गत बांकेगंज-गोला मार्ग पर इमलिया गांव के निकट शौर्य हॉस्पिटल के संचालक अजीत कुमार (36) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब गहराता जा रहा है। घटना के सात दिन बीत जाने के बाद भी हैदराबाद पुलिस के हाथ खाली हैं, जिससे पुलिस की कार्यशैली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित परिवार और स्थानीय जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि इतनी बड़ी घटना पर आखिर पुलिस प्रशासन ने चुप्पी क्यों साध रखी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला राज: सिर की हड्डी टूटी, फेफड़ा फटा
शुरुआती दौर में पुलिस द्वारा इस मामले को महज एक 'सड़क दुर्घटना' का रूप देने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिसिया थ्योरी पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक अजीत कुमार के सिर और सीने पर बेहद गंभीर और जानलेवा चोटों के निशान पाए गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार, अजीत के सिर की हड्डी टूटी हुई थी, पसलियां चकनाचूर थीं और फेफड़ा भी फटा हुआ मिला। मौत का मुख्य कारण मृत्यु से पूर्व लगी इन भयानक चोटों के चलते अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लडिंग) और शॉक (सदमा) बताया गया है।
दुर्घटना या सोची-समझी हत्या? इन सवालों ने पुलिस को घेरा
घटनास्थल और मृतक की कार की स्थिति को देखकर कोई भी इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि यह एक साधारण एक्सीडेंट है। मामले में कई ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं जो सीधे तौर पर मर्डर की ओर इशारा करते हैं:कार की स्थिति और चोटों में अंतर: जिस कार से अजीत कुमार के जाने की बात कही जा रही थी, वह सड़क किनारे एक गन्ने के खेत में दलदल के बीच फंसी हुई मिली। चौंकाने वाली बात यह है कि कार के अगले हिस्से पर कोई ऐसी बड़ी या स्पष्ट क्षति (डैमेज) नहीं है, जिससे किसी इंसान के सिर की हड्डी टूटने या फेफड़ा फटने जैसी जानलेवा चोटें आ सकें।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अजीत कुमार के नाक, कान और सिर से जिस बड़े पैमाने पर खून बह रहा था, उस हिसाब से कार की स्टीयरिंग, डैशबोर्ड और आगे के हिस्से पर खून के निशान होने चाहिए थे। लेकिन, हैरान करने वाली बात यह है कि खून के निशान आगे की बजाय कार की पीछे वाली सीट पर पाए गए हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि घटनाक्रम कुछ और ही है।
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब कार में कोई बड़ा एक्सीडेंट नहीं हुआ, तो अजीत के शरीर के भीतर इतनी घातक चोटें कैसे आईं? आखिर हैदराबाद पुलिस किस दबाव में इस मामले को हत्या की बजाय सड़क दुर्घटना में तब्दील करने पर तुली हुई है?पीड़ितों को कब मिलेगा न्याय?सात दिन का लंबा समय बीत जाने के बाद भी आरोपियों पर कोई ठोस कार्रवाई शून्य है। जनता के बीच यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि कहीं हैदराबाद पुलिस आरोपियों को बचाने का खेल तो नहीं खेल रही है? आखिर पुलिस किसका इंतजार कर रही है? इस रहस्यमयी खामोशी से पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद खोता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच हो ताकि सच सामने आ सके और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।






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