लब्बैक या रसूलुल्लाह की सदाओं से गूंजा कस्बा खीरी
लखीमपुर खीरी Aug 27, 2026 at 07:25 PM , 4खीरी टाउन खीरी। जश्ने ईद मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर कस्बा खीरी की फिजाएं नात-ओ-सलाम और “लब्बैक या रसूलुल्लाह” की सदाओं से गूंज उठीं। कस्बे की सदियों पुरानी रूहानी विरासत और हुजूर की मोहब्बत का खूबसूरत रंग जगह-जगह देखने को मिला। विशाल जुलूस, आकर्षक सजावट, कदम-ए-रसूल की जियारत, लंगर और विभिन्न कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। देर रात तक चले कार्यक्रम अमनो-अमान के साथ सम्पन्न हुए।
परचम कुशाई के बाद रवाना हुआ जुलूस
कस्बा खीरी स्थित सुन्नी इमामबाड़े पर परचम कुशाई के बाद विशाल जुलूस रवाना हुआ। जुलूस में बच्चों, नौजवानों और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। हाथों में परचम लिए बच्चे और नौजवान जुलूस की रौनक बढ़ाते नजर आए। विभिन्न मार्गों और मोहल्लों से गुजरते हुए जुलूस में नातिया कलाम और नात-ओ-सलाम की सदाएं गूंजती रहीं। सजी-धजी गाड़ियों पर लगे माइक से नातिया कलाम पेश किए गए।
“आमिना का लाल आया” और “लब्बैक या रसूलुल्लाह” जैसी सदाओं के बीच अकीदतमंदों का उत्साह देखते ही बन रहा था। जुलूस में बच्चों की भागीदारी ने यह संदेश भी दिया कि कस्बा खीरी की रूहानी और धार्मिक परंपराएं नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं।
मरकजी मस्जिद में हुई कदम-ए-रसूल की जियारत
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर दरगाह शरीफ की मरकजी मस्जिद में हर वर्ष की तरह इस बार भी कदम-ए-रसूल की जियारत कराई गई। जियारत के लिए सुबह से ही अकीदतमंदों का पहुंचना शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में जायरीन ने अदब और एहतराम के साथ जियारत की।
कदम-ए-रसूल की जियारत को लेकर कस्बा खीरी में विशेष अकीदत देखने को मिली। दूर-दूर से पहुंचे लोगों ने इस मुबारक मौके पर अपनी मोहब्बत और अकीदत का इजहार किया।
रोशनी से जगमगाए धार्मिक स्थल और मोहल्ले
जश्ने ईद मिलादुन्नबी को लेकर कस्बे के प्रमुख मार्गों, मोहल्लों और धार्मिक स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। शाहे विलायत हजरत मखदूम पीर रहमतुल्लाह अलैह की मजार रोशनी और सजावट से जगमगाती नजर आई। मोहल्ला सैय्यदवाड़ा पुलिया चौराहा, बुखारी टोला समेत कई स्थानों पर भी शानदार सजावट की गई।
सजावट में कस्बा खीरी की रूहानी विरासत और वर्षों पुरानी परंपरा की झलक दिखाई दी। लोगों ने घरों और गलियों को भी रोशनी से सजाया।
अंजुमन आकाये रसूल-खादिमाने मखदूम की महफिल ने बांधा समां
रात में अंजुमन आकाये रसूल-खादिमाने मखदूम की ओर से मिलाद शरीफ का आयोजन किया गया। महफिल में कारी अख्तर रजा, सैय्यद वजी मियां सहित दीगर शोरा-ए-कराम ने हुजूर की शान में नातिया कलाम पेश किए।
नातिया कलाम और सलाम के दौरान महफिल में मौजूद अकीदतमंदों का जोश देखते ही बन रहा था। “लब्बैक या रसूलुल्लाह” की सदाओं से माहौल गूंज उठा और हजारों हाथ अकीदत में हवा में लहराते नजर आए।
लंगर और सबील का भी हुआ इंतजाम
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में लोगों और अंजुमनों की ओर से लंगर, शर्बत और पानी की सबील का इंतजाम किया गया। जुलूस के रास्ते में अकीदतमंदों का स्वागत किया गया। पूरे आयोजन में लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
रूहानी विरासत और मोहब्बत का संदेश
कस्बा खीरी में ईद मिलादुन्नबी का आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कस्बे की रूहानी विरासत, सामूहिक परंपराओं और हुजूर की मोहब्बत की झलक दिखाई दी। बुजुर्गों की अकीदत, नौजवानों का उत्साह और बच्चों की भागीदारी ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।
विशाल जुलूस और विभिन्न कार्यक्रम देर रात तक जारी रहे। अंत में जश्ने ईद मिलादुन्नबी का आयोजन शांतिपूर्ण माहौल और अमनो-अमान के साथ सम्पन्न हुआ।






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