सच्चे रिश्ते की मिसाल:17 वर्षों से बिना किसी खून के रिश्ते के भाई-बहन का फर्ज निभा रहे अमरऔर मंजू
लखीमपुर खीरी Aug 27, 2026 at 06:47 PM , 11लखीमपुर खीरी।भाई-बहन का रिश्ता केवल एक ही कोख से पैदा होने का मोहताज नहीं होता, बल्कि यह दिलों के सच्चे स्नेह और विश्वास की डोर से बंधा होता है। ऐसा ही एक अनोखा और अटूट रिश्ता पिछले 17 वर्षों से लखीमपुर में देखने को मिल रहा है, जिसने समाज के सामने पवित्र बंधन की एक अनूठी मिसाल पेश की है।यह कहानी है सदर विकास खंड लखीमपुर की ग्राम पंचायत राजापुर मजरा पिपरिया के किशोर नगर कॉलोनी निवासी अमर पाल सिंह की।अमर पाल सिंह को हमेशा अपने जीवन में एक बहन की कमी खलती थी। उनका यह सपना तब सच हुआ जब उनका आना-जाना मुड़ियाखेड़ा गांव में हुआ।वहां रहने वाले अशोक वर्मा की सुपुत्री मंजू वर्मा को जब यह पता चला कि अमर पाल सिंह की अपनी कोई बहन नहीं है, तो उन्होंने आगे बढ़कर उन्हें अपना भाई माना और उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांध दिया। मंजू के इस स्नेह ने अमरपाल के जीवन की सबसे बड़ी कमी को पूरा कर दिया।आज जब भाई बहन का त्यौहार का समय आया तो उनकी इस खुशी में चार चाँद लग गए।यह कोई एक दिन का रिश्ता नहीं था।आज इस बात को करीब 17 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन दोनों के बीच का प्यार और सम्मान आज भी वैसा ही है। हर साल रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अमरपाल सिंह समय से मुड़ियाखेड़ा गांव पहुंचते हैं और अपनी बहन मंजू वर्मा से राखी बंधवाते हैं। दोनों पूरी पवित्रता और समर्पण के साथ इस त्योहार को मनाते आ रहे हैं।
समाज के लिए बने प्रेरणा
आज के दौर में जहां कई जगहों पर सगे भाई-बहनों के बीच छोटी-छोटी बातों या जमीन-जायदाद को लेकर मनमुटाव और झगड़े देखने को मिलते हैं, वहीं अमर पाल सिंह और मंजू वर्मा का यह रिश्ता समाज को एक नई दिशा दिखा रहा है। बिना किसी खून के रिश्ते के, सिर्फ भावनाओं के दम पर 17 सालों से इस बंधन को निभाना वाकई काबिले-तारीफ है। स्थानीय लोग भी इस भाई-बहन के अनोखे प्रेम और समर्पण को देखकर उनकी लगातार सराहना कर रहे हैं।






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