पूर्वोत्तर रेलवे के अधिकारियों से मैलानी जंक्शन से पलिया भीरा तिकुनिया मिहींपुरुआ नानपारा ब्रॉडगेज की मांग तेज।
लखीमपुर खीरी Aug 25, 2026 at 06:55 PM , 0विश्वकांत त्रिपाठी
पलिया कलां लखीमपुर खीरी। अंग्रेजी हुकूमत में बनी रेल लाइन नहीं बचा पा रहे,खीरी और बहराइच के सत्ता में बैठे नेता, विपक्ष के सांसद रुचि लेना तो दूर की बात पुरानी रेल लाइन उखड़वाने पर तुले, समाजवादी पार्टी के दोनों सांसद अपनी अपनी रोटियां से रहे मैलानी वीर पलिया बेलरायां रेल खंड पर सब ने साधी चुप्पी, अभी तक कहां निकलेगी व्राड गेज और कैसे बचेगी संरक्षित रेल लाइन इसका डायग्राम मसौदा किसी के पास नहीं, विभाग दे रहा लॉलीपॉप, शारदा पुल पर बना संख्या 97 के लिए 8.3 करोड़ रूपया रिलीज बताया गया है
नानपारा मैलानी के बीच विभिन्न तहसील क्षेत्रों के लोगों द्वारा जनआक्रोश सुगबुगाहट तेज हो गई है। इससे कहीं ना कहीं विभिन्न दलों के नेताओं पर भारी संकट दिखाई दे रहा है यहां तक की कुछ राजनीतिक दलों के ऊपर मतदाताओं का भारी आक्रोश भी दिखा जा रहा है एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा रेलवे को नामुमकिन पर भी मुमकिन कार्य कर देश की ऊंचाइयों तक ले जा कर इतिहास रच रहे हैं लेकिन मैलानी से नानपारा तक पडने वाले करीब दो दर्जन रेलवे प्लेटफार्म पर विरोध प्रदर्शन भी जारी है, और समय-समय पर ज्ञापन देकर आक्रोश जताया जा रहा है विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारियों किसानों आम नागरिक तथा जनता बडी संख्या में पूर्वोत्तर रेलवे के अपर महाप्रबंधक विनोद कुमार शुक्ल से जाकर मुलाकात कर इस क्षेत्र की बड़ी समस्याओं से अवगत भी कराया जा रहा है इसके बावजूद भी जमीनी स्तर पर कोई भी काम होता नहीं दिखाई दे रहा है जिससे आम जनमानस में भारी आक्रोश है,
सौपे गए ज्ञापनों के माध्यम से रेल प्रशासन को नए अपडेट्स के साथ अवगत कराया गया कि आज जब देश के लगभग सभी हिस्सों में रेल नेटवर्क का आधुनिकीकरण हो चुका है और अधिकांश रेल मार्ग ब्रॉडगेज में परिवर्तित हो चुके हैं, ऐसे में पलिया-तिकुनिया-मिहपुरवा क्षेत्र का यह महत्वपूर्ण रेल खंड जो नेपाल देश की सीमा से जुड़ा होने के साथ पूरी तरह अब भी उपेक्षित है। यह रेल मार्ग पूरी तरह पिछड़ा हुआ है और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए लंबे समय से अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहा है। रेल लाइन केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के लाखों लोगों, स्थानीय व्यापारियों, सीमांत किसानों, स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों तथा भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के यात्रियों के लिए जीवनरेखा के समान है।
ब्रॉडगेज के अभाव में क्षेत्र का आर्थिक और व्यापारिक विकास पूरी तरह से थम गया है। बड़ी लाइन बनने से न केवल नेपाल सीमा पर सामरिक और व्यापारिक गतिशीलता बढ़ेगी, बल्कि दुधवा आने वाले पर्यटकों के लिए भी राह आसान होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। ब्रॉडगेज के निर्माण कार्य की कागजी औपचारिकताओं और इसके वास्तविक क्रियान्वयन की शुरुआत होने तक क्षेत्र को लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने रेलवे से पुरजोर मांग की कि जब तक बड़ी लाइन का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान में बंद पड़ी पुरानी रेल सेवाओं को तुरंत प्रभाव से पुनः संचालित किया जाए, ताकि रोजमर्रा के आवागमन में आम जनता, गरीब मजदूरों और छोटे व्यापारियों को हो रही भारी कठिनाइयों से तत्काल राहत मिल सके।






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