अवैध रूप से संचालित जानकी हॉस्पिटल, नवजात की मौत के बाद शिकायतों ने खड़े किए गंभीर सवाल
लखीमपुर खीरी Aug 21, 2026 at 05:22 PM , 1पंद्रह अगस्त पर शुभकामना संदेश लेने गए पत्रकार से मारपीट, सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत
स्वास्थ मंत्री उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को भेजी है शिकायत,अस्पताल सील कराने की मांग
लखीमपुर खीरी। शहर में ऐरा रोड पर राजकीय पालिटेक्निक के पास संचालित जानकी अस्पताल को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। नवजात की मौत के बाद परिजनों द्वारा मुख्य चिकित्साधिकारी और पुलिस अधिकारियों को दी गई शिकायतों में अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही, बिना प्रशिक्षित चिकित्सक के डिलीवरी कराने और मरीजों से कथित तौर पर मनमानी फीस वसूलने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में अस्पताल को बंद कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।शिकायतकर्ता जितेन्द्र सिंह, निवासी ग्राम सिरैचा, थाना व जिला खीरी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनकी पत्नी रंजना सिंह की डिलीवरी के लिए उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शिकायत के अनुसार, 17 अगस्त 2026 की सुबह करीब पांच बजे पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया गया और नॉर्मल तथा ऑपरेशन दोनों प्रकार की डिलीवरी के लिए करीब 18 हजार रुपये की फीस बताई गई।
परिजनों का आरोप है कि करीब 11 बजे तक कोई प्रशिक्षित डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा और अप्रशिक्षित लोगों द्वारा डिलीवरी कराने का प्रयास किया गया। शिकायत में कहा गया है कि डिलीवरी के दौरान बच्चे को कथित रूप से खींचने की कोशिश की गई, जिसके बाद नवजात की मौत हो गई। आरोप है कि इसके बाद भी काफी देर तक परिजनों को बच्चे की मौत की जानकारी नहीं दी गई।शिकायतकर्ता के मुताबिक, 7,500 रुपये जमा कराने के बाद इलाज शुरू किया गया, लेकिन बच्चे की मौत के बाद भी शेष रकम जमा कराने का दबाव बनाया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बच्चे की हालत गंभीर बताकर परिजनों से भुगतान कराया जाता रहा, जबकि मौत पहले ही हो चुकी थी।
मामले को लेकर एक अन्य हस्तलिखित शिकायत में अस्पताल से जुड़े लोगों पर कथित अभद्रता और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने पुलिस से घटना की जानकारी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
पत्रकारों के संरक्षण का आरोप जांच की मांग
मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि जानकी अस्पताल बिना वैध अनुमति, योग्य चिकित्सकीय स्टाफ या आवश्यक मानकों के संचालित हो रहा है, तो लंबे समय से संबंधित विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी,शिकायत में अस्पताल को कथित रूप से कुछ पत्रकारों का संरक्षण मिलने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, यह आरोप अभी शिकायतकर्ता के दावे तक सीमित हैं और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।अब सवाल यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इस अस्पताल की मान्यता, पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता, स्टाफ की उपलब्धता, डिलीवरी की प्रक्रिया और मरीजों से वसूली गई फीस की जांच करेगा,नवजात की मौत जैसे गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। यदि जांच में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि लगाए गए आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।फिलहाल पूरा मामला जांच का विषय है। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और अस्पताल प्रबंधन की इसमें कोई जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
स्वतन्त्रा दिवस के अवसर पर हुआ था पत्रकार पर हमला
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बधाई संदेश लेने पहुंचे एक पत्रकार पर हॉस्पिटल प्रबंधन ने बहुत ही बत्तमीजी से पेश आते हुए गाली गलौज की और हमला भी कर दिया था जिसकी शिकायत पत्रकार ने लिखित रूप से कोतवाली सदर मे की थी जिस पर पुलिस ने मारपीट और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज किया तजा किन्तु अभी तक स्वास्थ विभाग से कोई ठोस कार्रवाई जाँच नहीं हुई है इससे मामला और भी सन्देह उत्पन्न कर रहा है की कही स्वास्थ विभाग का संरक्षण तो नहीं दिया जा रहा है।































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