*फुटपाथ पर चलना जनता का मौलिक अधिकार है*
लखीमपुर खीरी Jun 20, 2026 at 03:55 PM , 13संवाददाता
लखीमपुर खीरी/न्यू दिल्ली 20 जून, सुप्रीम कोर्ट ने चिह्नित फुटपाथ पर सुरक्षित चलने के मौलिक अधिकार को मान्यता दी है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को दिए अहम फैसले में कहा कि सुरक्षित व सीमांकित फुटपाथ पर पैदल चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, और इसे वाहनों की आवाजाही पर प्राथमिकता दी जाएगी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि सड़क पर यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि पैदल चलने वालों के लिए निर्धारित स्थान पर और अच्छी तरह से बने हुए फुटपाथ हों। फुटपाथ बनाने और उसे अच्छी स्थिति में रखने की जिम्मेदारी विकास प्राधिकरण, नगर निगम, नगर पालिकाओं और पंचायतों की है। उन्हें फुटपाथ और पैदल चलने वालों के लिए बुनियादी फुटपाथ और पैदल चलने वालों के लिए बुनियादी ढांचा तय करने, बनानें और देखभाल सुरक्षित रखना चाहिए। साथ ही निर्धारित फुटपाथ पर चलने के मौलिक अधिकार को बेहतर और प्रभावी बनाने के लिए, इस संबंध में एक नियामक निकाय बनाने पर जोर दिया।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए.एस
चंदुरकर की पीठ ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले एक स्कूल जा रहे पांच वर्षीय बच्चें की मौत का मुआवजा बढ़ाते हुए यह निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के भाग-तीन के तहत एक मौलिक अधिकार है। यह अनुच्छेद 19 (1) (डी), 19 (1) (ए), 19 (1) (बी), 19(1) (सी) और अनुच्छेद 21 में दिए गए घूमने-फिरने के अधिकार का एक अहम हिस्सा है।
*फुटपाथ पर चलने के अधिकार के लिए कानून जरूरी*
पीठ ने कहा कि जहां तक निर्धारित फुटपाथ पर चलने के अधिकार की बात है तो यह अनुच्छेद 21 और 19 (1) (डी) का अहम हिस्सा है, लेकिन इसके लिए कोई कानून नहीं है। सिर्फ इस अधिकार को घोषित करने के लिए ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने वालों की पहचान करने के लिए भी एक कानूनी ढांचा बनाना जरूरी है। इसके लिए एक पूर्णकालिक नियामक भी बनाना चाहिए।































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