परिवहन विभाग में तबादलों को लेकर हलचल, अपर परिवहन आयुक्त ने कर्मचारी संघों से मांगी पदाधिकारियों की सूची

लखनऊ , 21

लखनऊ। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने नई तबादला नीति 2026-27 लागू होने के बाद अपर परिवहन आयुक्त ने कर्मचारी संघों से उनके पदाधिकारियों की सूची मांगी है। अपर परिवहन आयुक्त (प्रशासन) चित्र लेखा सिंह की ओर से यह पत्र जारी किया गया है। इसमें संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष और महामंत्री को 15 मई 2026 तक पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बता दें विभाग ने यह कदम राज्य सरकार की नई स्थानांतरण नीति के तहत उठाया है। शासनादेश 5 मई 2026 को जारी हुआ था। इसी के आधार पर अब मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघों के प्रदेश, मंडल और जिला स्तर के पदाधिकारियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। 
पत्र में साफ कहा गया है कि कर्मचारी संघों के अध्यक्ष और सचिव को पद संभालने की तारीख से दो साल तक तबादले से राहत दी जा सकती है। लेकिन अगर किसी पदाधिकारी पर भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता, लापरवाही या आपराधिक गतिविधियों के आरोप साबित होते हैं, तो उनका ट्रांसफर कभी भी किया जा सकेगा। नई नीति के मुताबिक जिलों में तैनात संघ पदाधिकारियों के तबादले जिलाधिकारी की संस्तुति पर होंगे। वहीं मंडल स्तर के कर्मचारियों के मामलों में मंडलायुक्त की संस्तुति जरूरी होगी। मुख्यालय स्तर के पदाधिकारियों के ट्रांसफर शासन स्तर से किए जाएंगे।
परिवहन विभाग ने कर्मचारी संघों से जो जानकारी मांगी है, उसमें पदाधिकारी का नाम, जनपद, संघ में पद, चुनाव की तारीख, पद ग्रहण करने की तारीख और कार्यकाल खत्म होने की तिथि शामिल है। विभाग चाहता है कि सभी रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध हो जाएं ताकि नई नीति के अनुसार कार्रवाई की जा सके।
इस आदेश के बाद परिवहन विभाग में तबादलों को लेकर हलचल तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों पर भी अब विभागीय निगरानी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार इस बार तबादला प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और रिकॉर्ड आधारित बनाना चाहती है। आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी इसी तरह कर्मचारी संघों का डाटा जुटाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया में नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और विवाद की स्थिति भी कम हो सकती है।

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