ग्रांट एक्ट की जमीनों में विधायक रोमी साहनी की भूमिका महत्वपूर्ण
लखीमपुर खीरी Apr 09, 2026 at 06:22 PM , 77लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश में ग्रांट एक्ट (Government Grants Act) के तहत दी गई जमीनों (खासकर लखीमपुर खीरी और पलिया जैसे क्षेत्रों में) को लेकर हाल ही में हुए बदलावों में पलिया विधायक रोमी साहनी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम में उनके योगदान को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
1. विधानसभा में निरंतर पैरवी
विधायक रोमी साहनी ने कई वर्षों तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में ग्रांट एक्ट की जमीनों को फ्री-होल्ड (मालिकाना हक) दिलाने के लिए आवाज उठाई। लखीमपुर खीरी के पलिया और संपूर्णानगर जैसे क्षेत्रों में हजारों परिवार दशकों से इन जमीनों पर खेती कर रहे थे, लेकिन तकनीकी रूप से वे इसके मालिक नहीं थे। साहनी ने इसे एक बड़ा चुनावी और जनहित का मुद्दा बनाया।
2. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधा संवाद
रोमी साहनी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कई व्यक्तिगत मुलाकातें कीं। उन्होंने सरकार को यह समझाने में सफलता हासिल की कि ये जमीनें (जो 15 से 99 साल की लीज पर थीं) किसानों और स्थानीय निवासियों की आजीविका का एकमात्र साधन हैं। उनके प्रयासों का ही नतीजा था कि सरकार ने इस दिशा में नीतिगत बदलाव के लिए राजस्व विभाग को निर्देशित किया।
3. 'नजूल' और 'ग्रांट एक्ट' की जटिलता सुलझाना
जब सरकार ने नजूल संपत्ति विधेयक 2024 पेश किया, तो उसमें ग्रांट एक्ट की जमीनों को लेकर भी संशय था। रोमी साहनी ने स्थानीय किसानों और व्यापारियों का पक्ष मजबूती से रखा ताकि नियम स्पष्ट हों और जो लोग पीढ़ियों से रह रहे हैं, उन्हें उजाड़ा न जाए बल्कि उचित शुल्क लेकर मालिकाना हक दिया जाए।
4. 1600+ परिवारों की सूची और मुकदमों का निस्तारण
अक्टूबर 2025 के आसपास की रिपोर्ट्स के अनुसार, रोमी साहनी ने मुख्यमंत्री को 1600 से अधिक ऐसे लोगों की सूची सौंपी थी, जिन पर पिछली सरकारों के दौरान भूमि विवादों से जुड़े कथित फर्जी मुकदमे दर्ज हुए थे। उन्होंने इन मुकदमों को खत्म करने और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की थी, जिस पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिया।
सारांश
सरल शब्दों में कहें तो, पलिया क्षेत्र के लिए ग्रांट एक्ट की जमीन का मुद्दा रोमी साहनी के राजनीतिक करियर का मुख्य एजेंडा रहा है। सरकार द्वारा इस भूमि पर सर्कल रेट का कुछ प्रतिशत लेकर फ्री-होल्ड करने का जो रास्ता निकला है, उसका श्रेय स्थानीय स्तर पर उनकी "लगातार की गई पैरवी" को ही दिया जाता है। हालांकि यह प्रक्रिया अभी भी विभिन्न चरणों में है, लेकिन रोमी साहनी की सक्रियता ने इसे ठंडे बस्ते से निकालकर सरकार की प्राथमिकता सूची में ला दिया।






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