सरकारी दावों की खुली पोल, बारदाने के अभाव में अधर में लटकी गेहूं खरीद

लखीमपुर खीरी , 73

(मनोज मिश्र)

धौरहरा (खीरी): उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा है कि किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम मिले, लेकिन धौरहरा तहसील क्षेत्र में जमीनी हकीकत इसके उलट है। शासन के आदेशानुसार 1 अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू होनी थी, लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी क्षेत्र के अधिकांश क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। बदइंतजामी का आलम यह है कि 14 स्वीकृत केंद्रों पर अब तक न तो बारदाना (बोरे) पहुंचे हैं और न ही अन्य आवश्यक उपकरण, जिससे सरकारी खरीद की व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी नजर आ रही है।
बिचौलियों के चंगुल में फंसने को मजबूर किसान
सरकार ने चालू सत्र के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। हालांकि, क्रय केंद्रों पर बारदाना न होने का बहाना बनाकर किसानों को वापस लौटाया जा रहा है। मजबूरन, किसान अपनी साल भर की मेहनत को बिचौलियों के हाथों 2100 से 2130 रुपये प्रति क्विंटल के औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं।
खुले आसमान के नीचे फसल, मौसम का डर
कफारा के किसान गंगासिंह, धौरहरा के रमाशंकर शुक्ला, नंदकिशोर जायसवाल, अफजाल अहमद और शशांक शुक्ला सहित दर्जनों किसानों ने आरोप लगाया कि वे कई दिनों से ट्रैक्टर-ट्रॉली में गेहूं लादकर केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। केंद्रों पर खरीद न होने से न केवल उनकी लागत बढ़ रही है, बल्कि समय भी बर्बाद हो रहा है। कई किसानों ने गेहूं खुले आसमान के नीचे रखा है, जिससे बेमौसम बारिश होने पर फसल खराब होने का डर बना हुआ है।
अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया
एक तरफ किसान परेशान हैं, तो दूसरी तरफ तहसील प्रशासन के पास क्षेत्र में संचालित क्रय केंद्रों की आधिकारिक सूची तक उपलब्ध नहीं है। जब इस संबंध में क्षेत्रीय विपणन अधिकारी राजेश राम से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि तहसील के 14 केंद्रों पर अभी बारदाना नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा, "एक सप्ताह में बारदाना मिलने की उम्मीद है, इसके लिए व्यापारियों से बात की जा रही है। जल्द ही व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाएगी।"
अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने 1 अप्रैल से खरीद के निर्देश दिए थे, तो समय रहते बारदाने और उपकरणों का प्रबंध क्यों नहीं किया गया? अधिकारियों की इस सुस्ती का खामियाजा गरीब किसान अपनी जेब काटकर भुगत रहा है।

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