“मानव जीवन की सार्थकता जीते जी अमरत्त्व प्राप्ति में " : महात्मा दीपक दास जी

लखीमपुर खीरी , 408

“भगवत् कृपा ही केवलम्”


(केके शुक्ला)
    
देवरिया/लखीमपुर। स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में श्री विष्णु मंदिर, विशनपुरा बाजार, देवरिया में सत्संग एवं भजन कीर्तन का कार्यक्रम में बोलते हुए महात्मा दीपक दास ने कहा, 
             हम जीवों को  मनुष्य शरीर मिली ही इसीलिये कि  भगवान को साक्षात् जानते-देखते हुये मुक्ति-अमरता के साक्षात् बोध रूप मानव जीवन के चरम व परम लाभ को प्राप्त करें। अपने शिष्यों को ऐसी उपलब्धि देने वाला गुरु ही सच्च्चा गुरु अर्थात सदगुरु होता है ।
                    सच्चे गुरु की पहचान सच्चे ज्ञान के आधार पर होती है और सच्चा ज्ञान कहते ही उसे है कि जिसमें चार अक्षर वाला विराट रूप भगवान सामने ही देखने को मिले ।  जिस भगवान में संसार-शरीर-जीव-ईश्वर और परमेश्वर की सम्पूर्ण जानकारी शिक्षा-स्वाध्याय-अध्यात्म और तत्त्वज्ञान के माध्यम से साक्षात् देखते हुये मुक्ति-अमरता का साक्षात् बोध प्राप्त हो। यदि ऐसा नहीं हो तो वह मिलने वाला भगवान् वास्तविक भगवान नहीं और जब वह भगवान सच नहीं तो वह ज्ञान भी सच नहीं । जब वह ज्ञान ही सच नहीं तो उस ज्ञान का दाता गुरु भला सच कैसे हो सकता है ? सच्चे गुरु से सच्चा ज्ञान और सच्चे ज्ञान में सच्चा भगवान् तथा सच्चे भगवान से मुक्ति-अमरता का साक्षात् बोध तत्क्षण प्राप्त होता है जो हमे हमारे सद्गुरुदेव सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस से मिला।

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