"ब्रह्मोत्सव" में फूलों की फुहार से झूम उठा इस्कॉन

लखीमपुर खीरी , 106

(सुनील शर्मा)

लखीमपुर खीरी। लखीमपुर की पुण्यभूमि ने एक बार फिर उस अद्भुत क्षण को साकार होते देखा, जब आस्था ने रंगों का रूप धारण कर लिया और भक्ति ने फूलों की वर्षा में अपनी मधुर अभिव्यक्ति दी। स्थानीय एलआरपी चौराहे के निकट स्थित इस्कॉन मंदिर परिसर में आयोजित “फूलों की होली - ब्रह्मोत्सव” ने श्रद्धा, संस्कृति और आध्यात्मिक उल्लास का ऐसा संगम रचा, जिसने उपस्थित हर हृदय को राधा-कृष्ण प्रेम में सराबोर कर दिया।
सायं 4 बजे जैसे ही उत्सव का शुभारंभ हुआ, वातावरण “हरे कृष्ण” महामंत्र के दिव्य उद्घोषों से गूंज उठा।भक्ति की इस सुरसरिता में जब 501 किलोग्राम पुष्पों की वर्षा आरंभ हुई, तो हर ओर रंगों के स्थान पर फूलों की सुगंधित छटा बिखर गई, एक ऐसा दृश्य, जिसने समय को भी ठहरने पर विवश कर दिया। इस भव्य आयोजन की गरिमा उस समय और बढ़ गई, जब परम पूज्य संत भक्ति आश्रय वैष्णव स्वामी महाराज जी का प्रथम बार लखीमपुर आगमन हुआ। उनके सान्निध्य एवं प्रवचन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। साथ ही, प्रेम हरिनाम प्रभु (अध्यक्ष, इस्कॉन कानपुर) की पावन उपस्थिति ने भक्तों के उत्साह को और भी ऊँचाइयों तक पहुंचा दिया। कानपुर से पधारी कीर्तन मण्डली ने जब मृदंग और झांझ की थाप पर संकीर्तन प्रारंभ किया, तो भक्तजन स्वयं को थिरकने से रोक न सके। फूलों की वर्षा के बीच नृत्य करती श्रद्धा, झूमते भाव और भक्ति में डूबे चेहरे, यह सब मिलकर एक ऐसा अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे, जिसे शब्दों में बाँध पाना कठिन था। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत मधुर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी सभी का मन मोह लिया। उनकी निष्कलुष अभिव्यक्तियों में भक्ति की सरलता और सच्चाई स्पष्ट झलक रही थी। इस अवसर पर मंदिर के नित्य सेवक भक्तों को विशेष उपहार भेंट कर उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई, यह भाव अपने आप में सेवा और समर्पण की अनूठी मिसाल बना। आयोजन के समापन पर भव्य भंडारे के माध्यम से सभी को प्रसाद वितरण किया गया, जहां हर श्रद्धालु ने प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण कर इस दिव्य अनुभव को अपने हृदय में संजो लिया। इस संपूर्ण आयोजन को भव्यता और दिव्यता प्रदान करने में संयोजक सुनील मुकुंद प्रभु की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही। उनके कुशल संयोजन और इस्कॉन परिवार के समर्पित प्रयासों ने इस ब्रह्मोत्सव को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम का जीवंत उत्सव बना दिया। यह “फूलों की होली” केवल रंगों का उत्सव नहीं थी, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला एक आध्यात्मिक सेतु थी, एक ऐसा अनुभव, जिसने लखीमपुर की धरा को भक्ति के सुगंधित पुष्पों से सदा के लिए महका दिया।
उक्त जानकारी नूतन मिश्रा, मीडिया प्रभारी एवं स्पर्श सिन्हा सह मीडिया प्रभारी द्वारा दी गई।

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