खीरी में इंसानियत शर्मसार अंधी बुजुर्ग महिला भूख और बेबसी में जीने को मजबूर

लखीमपुर खीरी , 100

खीरी टाउन-खीरी
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद के कस्बा खीरी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इंसानियत को झकझोर कर रख देती है। यहां एक बुजुर्ग महिला, जिसकी आंखों की रोशनी जा चुकी है, बिना छत और बिना किसी सहारे के जिंदगी गुजारने को मजबूर है।
महिला के पास न राशन कार्ड है, न पेंशन और न ही किसी प्रकार की सरकारी सहायता। परिवार में केवल एक बेटा है, जो रोज मजदूरी के लिए निकलता है, लेकिन काम की अनिश्चितता के चलते कई बार मां-बेटे को भूखे पेट ही सोना पड़ता है।
फटे कपड़े, जर्जर झोपड़ी और मोहल्ले वालों की रहमदिली के सहारे चल रही यह जिंदगी किसी तरह आगे बढ़ रही है। कभी-कभी कोई दो वक्त की रोटी दे देता है, तो दिन कट जाता है, वरना हालात और भी बदतर हो जाते हैं।
हाल ही में जहां पूरे क्षेत्र में ईद का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, वहीं इस महिला के घर न चूल्हा जला और न ही कोई खुशियां पहुंच सकीं।
गौरतलब है कि एक ओर प्रशासन सड़कों पर कंबल बांटकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराता नजर आता है, वहीं दूसरी ओर इतनी दयनीय स्थिति में जी रही इस महिला तक मदद की एक किरण भी नहीं पहुंच पाई।
करीब 70 हजार की आबादी वाले कस्बा खीरी में अगर एक अंधी बुजुर्ग महिला इस हाल में जीवन यापन कर रही है, तो यह न सिर्फ प्रशासन बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।
यह खबर केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक आईना हैउन लोगों के लिए, जो सुविधाओं के बीच सुकून से जीवन जी रहे हैं।अब देखना यह है कि क्या इस खबर के बाद प्रशासन जागेगा, या फिर इंसानियत यूं ही शर्मसार होती रहेगी।

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