नबीउल्ला हत्याकांड में ढीलासाजी से पीडित पक्ष में दहशत

लखीमपुर खीरी , 193

मोहम्मदी-खीरी। मुड़िया खेड़ा बैदा के मुसीम हत्या कांड की ही भाति ग्राम मगरेना के नबीउल्ला हत्याकांड के नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार करना तो दूर उन्हे तलाश करने करने, घटना स्थल का जायजा लेने या घायलांे, गवाहांे के बयान लेने तक विवेचक नगर की सीमा पर स्थित गांव तक नहीं गए। बेखौफ घूम रहे नामजद अभियुक्त दूसरी घटना को अंजाम देने के बाद जेल जायेगे की धमकियां दे रहे है। मृतक के बड़े भाई जकीउल्ला इनका निशाना बन सकते हंै ऐसी आशंका जकीउल्ला ने व्यक्त की है। उनका कहना है कि लोग आम के बाग में बराबर आ रहे है। पुलिस को अवगत भी कराया गया है लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
         सात दिन पूर्व 22 मई को दिन-दिहाड़े पूर्व नियोजित योजना के तहत ग्राम मगरेना में कमाल, जमाल सहित दस लोगो ने नबीउल्ला की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी तथा उन्हे बचाने आये उनके भाई भतीजो को गम्भीर रूप से जख्मी कर दिया था। इस जघन्य हत्याकांड में दस लोगांे को नामजद किया गया था। इस घटना में शुरू से ही पुलिस का रवैया पीड़ित विरोधी नजर आया। अगर पुलिस चाहती तो घटना वाले दि नही कुछ अभियुक्तो को पकड़ा जा सकता था लेकिन पुलिस सने अभियुक्तो व उनके घरो-परिवार जनो पर शिकन्जा कसने के बजाए दूसरो पर शिकन्जा कसा और एक परिवार को घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया घर में पुलिस ने ताला डाल दिया और छः दिन के बाद घर की चाबी दी। यही नहीं पुलिस ने तीन घायलो का डाक्टरी परीक्षण भी घटना वाले दिन नहीं कराया और चार दिन के बाद जब पुलिस को होश आया तो तीन घायलो का डाक्टरी परीक्षण 25 मई को कराया गया। इसी दिन जकीउल्ला ने पुलिस को बताया था कि उसे शंका है उसका ये अभियुक्त घेराबन्दी कर रहे हैं, उसे भय है कि आजाद घूम रहे अभियुक्त उसकी भी हत्या कर सकते है ताकि मुकदमे की पैरवी न हो सके। पुलिस ने जकीउल्ला के भय को भी नजर अंदाज कर दिया। मगरेना गांव की इस घटना में पुलिस जो रवैया अपनाये हुए है वही रवैया दो माह पूर्व हुए ग्राम मुड़िया खेड़ा बैदा में मुसीम हत्याकांड में पुलिस अपना रही है। यहां पुलिस ने दूसरा अभियुक्त जब पकड़ा जब मुसीम के पिता ने दर्जनो शिकायती पत्र मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक से लेकर एसपी तक भेजे। जब विवेचक ने कोतवाली की कुर्सी छोड़ी और रस्म अदा कर एक अभियुक्त को पकड़ कर जेल भेज दिया। ये स्थिति मगरेना के नबीउल्ला हत्याकांड की है। यहां आज एक सप्ताह बीत गया और पुलिस गांव तक नहीं पहुंच सकी। जब पुलिस गांव नहीं जायेगी, अभियुक्तो को पकड़ने के लिये उनके परिवार जनो एवं मददगारो पर दवाब नहीं बनायेगी तो अभियुक्त पकड़ में कैसे आयेगे। पुलिस की उदासीनता ये दर्शा रही है कि जैसे मुड़िया खेड़ा में पुलिस की सरपरस्ती नामजद अभियुक्तो को प्राप्त है कही वैसी ही मगरेना में तो खेल नहीं खेला जा रहा है ?

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