बाजार का निर्माण से लोगों को मिलेगी राहत

लखीमपुर खीरी , 148

(मनोज मिश्र)

धौरहरा खीरी।
प्रदेश में विकास मॉडल को साकार करने की दिशा में योगी आदित्यनाथ के सपनों से प्रेरित और जिला मुख्यालय के मार्गदर्शन में विकास खंण्ड धौरहरा की ग्राम पंचायत सरसवा ने आत्मनिर्भरता की ओर ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है।यहां मनरेगा योजना से निर्मित ग्रामीण हाट बाजार खीरी जनपद की पहली ऐतिहासिक ग्राम पंचायत बन गई है, जहां विकसित भारत की कल्पना को जमीनी रूप दिया गया।
विदित हो पहले यह हाट बाजार खुले आसमान व कीचड़ गंदगी के बीच लगता था।बारिश,आंधी-तूफान और बाढ़ के कारण दुकानदारों को अपने उत्पाद बचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।अचानक मौसम खराब होने से सामान खराब हो जाता था और दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। सरसवा बाढ़-ग्रस्त ग्राम पंचायत होने के कारण यहां एक से दो फीट तक शारदा नदी का पानी कई महीनों तक भरा रहता था जिससे बाजार सड़क पर लगाना पड़ता था और आवागमन बाधित होता था।अब 13.51 लाख रुपये की लागत से 120 दुकानों बने इस आधुनिक ग्रामीण हाट में 16 टीन शेड,पक्का फर्श और इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है। बाजार परिसर को दो फिट ऊंचा कराया गया है,जिससे जलभराव की समस्या समाप्त हो गई है।सप्ताह में सोमवार और गुरुवार को लगने वाला यह बाजार अब सुव्यवस्थित वातावरण में संचालित होगा।16 शेड में से एक शेड स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए निःशुल्क आरक्षित किया गया है, जहां वे अपने उत्पादों की बिक्री कर सकेंगी। इससे महिलाओं की आय में वृद्धि और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। बाजार परिसर में पुरुष एवं महिला शौचालय, वाहन स्टैंड तथा जनसुविधा केंद्र की स्थापना भी की गई है, जिससे ग्रामीणों को डिजिटल योजनाओं की जानकारी और लाभ मिल सकेगा। साथ ही परिसर स्थित मंदिर का भी कायाकल्प कराया गया है।दुकानों के आवंटन हेतु एकमुश्त पंजीकरण शुल्क शेड के अंतर्गत 500 रुपये तथा बाजार प्रांगण में 200 रुपये निर्धारित किया गया है। साप्ताहिक शुल्क क्रमशः 50 रुपये और 20 रुपये तय किया गया है। यह धनराशि ग्राम पंचायत के ओएसआर खाते में सुरक्षित रखी जाएगी, जिससे पानी, प्रकाश और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।ग्रामीण हाट के निर्माण से जहां एक ओर ग्रामवासियों को दैनिक उपयोग की वस्तुएं अपनी ही पंचायत में उपलब्ध होंगी, वहीं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही अब शादी-विवाह, जन्मदिन, पूजापाठ जैसे आयोजनों के लिए भी न्यूनतम शुल्क पर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। हाट से होने वाली आय का उपयोग पंचायत के अन्य विकास कार्यों में किया जाएगा।
यह ग्रामीण हाट बाजार वास्तव में आत्मनिर्भर ग्राम पंचायत की दिशा में मजबूत और प्रेरणादायी कदम साबित हो रहा है।

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