बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहा पलिया

लखीमपुर खीरी , 173

(वीके त्रिपाठी/केके शुक्ला) 

लखीमपुर/पलिया। पलिया क्षेत्र की बदहाल बीस्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रमुख समाजसेवी आलोक मिश्रा ‘भइया’ ने कहा कि आज पूरा पलिया क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं के अभाव में सिसक रहा है। उन्होंने कहा कि पलिया अपनी बुनियादी पहचान और विकास की दिशा दोनों खोता जा रहा है। युवाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आज तक न तो कोई खेल का मैदान उपलब्ध है और न ही आधुनिक स्टेडियम, वहीं बुजुर्गों के लिए ऐसा कोई पार्क नहीं है जहाँ वे कुछ पल सुकून से बैठ सकें।

उन्होंने बताया कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक जर्जर सड़कों की भरमार है, जिससे आमजन का आवागमन अत्यंत कठिन हो गया है। जगह-जगह गड्ढों से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। सड़कों पर स्ट्रीट लाइटों का घोर अभाव है, जिसके कारण रात के समय पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहता है। यह स्थिति सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहद चिंताजनक है।

आलोक मिश्रा ‘भइया’ ने कहा कि रेल सेवा का ठप होना और आज तक रोडवेज बस अड्डे की व्यवस्था न होना पलिया के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। परिवहन सुविधाओं के अभाव में आम नागरिक, छात्र, व्यापारी और मरीज सभी परेशान हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि शारदा नदी तट स्थित अन्त्येष्टि स्थल तक शव ले जाने के लिए संधान वाहन जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव एक अत्यंत गंभीर और मानवीय समस्या है। कई बार परिजनों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जो प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

इसके साथ ही उन्होंने किसानों की गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि क्षेत्र के गन्ना किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। गन्ना भुगतान में देरी के कारण किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है और उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने में कठिनाई हो रही है। किसान पहले से ही बढ़ती लागत और प्राकृतिक आपदाओं से परेशान हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र की जनता और किसान जंगली जानवरों के आतंक से अत्यंत प्रभावित हैं। जंगली जानवरों द्वारा फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया जा रहा है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। आए दिन ग्रामीणों का जंगली जानवरों से सामना हो रहा है, जिससे भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। कई बार यह स्थिति जनहानि के खतरे तक पहुँच जाती है। उन्होंने प्रशासन से वन विभाग के माध्यम से ठोस और प्रभावी कार्रवाई की माँग की।

आलोक मिश्रा ‘भइया’ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पलिया की ये प्राथमिक आवश्यकताएँ—सड़क, रोशनी, परिवहन, खेल, पार्क, अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत सुविधाएँ, किसानों का बकाया भुगतान तथा जंगली जानवरों से सुरक्षा—पूरी नहीं की जातीं, तब तक विकास की सारी बातें केवल कागजी साबित होंगी। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पलिया की दुर्दशा पर तत्काल ध्यान देने की माँग की।

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