मौत को दावत दे रहीं ओवर‌ हाइट, मानक विहीन यात्रियों ठसाठस भरी बसे जिम्मेदार मस्त

लखीमपुर खीरी , 116

   "जंगल से घिरे पलिया-गौरीफंटा मार्ग पर किसी भी पल हो सकता है बड़ा हादसा"

विश्वकांत त्रिपाठी 

पलिया कलां लखीमपुर-खीरी।
पलिया से दुधवा होते हुए गौरीफंटा नेपाल बार्डर तक जाने वाली निजी यात्री बसों में यात्रियों की सुरक्षा को खुलेआम ताक पर रखा जा रहा है। बसों की छतों पर तय मानकों से कहीं अधिक ऊंचाई तक सामान लादकर ले जाया जा रहा है, जो किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
      इस तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बस की छत पर बेतरतीब ढंग से भारी सामान लादा गया है, जिससे बस की ऊंचाई खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है, केवल इतना ही नहीं लखनऊ दिल्ली अमृतसर चंडीगढ़ आदि महानगरों से चलने वाली बेसन की डिग्री तथा छत पर पूरी तरह इसी तरह लाकर लगेज लाया जाता है जिससे कस्टम व सेल टैक्स को भी खास चुनाव लगता है इस बाबत में कभी कस्टम विभाग उन बसों को चेक करता है ना ही सल टैक्स
 आबकारी विभाग तो केवल धन दोहन में मस्त है अन्य प्रदेशों से बसों के माध्यम से शराब की तस्करी भी चरम पर है। 
    चंदनचौकी-गौरीफंन्टा मार्ग पर करीब 35 किलोमीटर तक घना जंगल है, ऐसे में ओवरहाइट बस का किसी भी पेड़ की डाल या शाखा में फंस जाना बेहद आसान है, जिससे बस के अनियंत्रित होकर पलटने या गंभीर दुर्घटना होने की पूरी आशंका बनी रहती है। इसके अलावा गौरीफंटा रोड अत्यंत संकरी है, जहां दो वाहनों का आमने-सामने निकलना भी चुनौती बना रहता है। यहां साइड देने के लिए वाहनों को सड़क से नीचे उतारना पड़ता है, जहां दोनों ओर गहरे गड्ढे हैं और उनमें कीचड़ भरा रहता है और रोड के किनारे सड़क निर्माण विभाग द्वारा कोई एजिंग भी नहीं लगीं सड़क की बदहाली और बसों पर किए जा रहे खतरनाक ओवरलोडिंग के चलते हर सफर जोखिम भरा रहता है। 
    बावजूद इसके न तो परिवहन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई हो रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों को यात्रियों की सुरक्षा की चिंता है। बस संचालक मनमानी पर उतारू हैं और यात्रियों की जान को दांव पर लगाकर अधिक मुनाफा कमाने में जुटे हुए हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन बसों में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी सफर करते हैं। जरा सी चूक या असंतुलन पूरे वाहन को मौत के कुएं में झोंक सकता है। इसके बाद भी इन्हें न तो बस पलटने की चिंता है और न ही उसमें सवार यात्रियों की जिंदगी की।
इस मार्ग पर चलने वाली बसों की सख्त जांच कराई जाए और ओवरलोडिंग पर तत्काल रोक लगे। साथ ही इस तरह के बस संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले ही स्थिति को संभाला जा सके।

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