खाद्य वितरण में शोषण का आरोप किसानों का गुस्सा फूटा हुआ हंगामा

लखीमपुर खीरी , 181

(हरिशंकर मिश्र)

लखीमपुर खीरी। विकास खंड बिजुआ अंतर्गत साधन सहकारी समिति बसतौली में आज यूरिया वितरण को लेकर  खाद की किल्लत से जूझ रहे किसानों का धैर्य जवाब दे गया और वहां खाद वितरण को लेकर जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया और वितरण प्रक्रिया के दौरान अव्यवस्था फैल गई। मिली जानकारी के अनुसार मामले ने तब और भी तूल पकड़ लिया जब समिति के कर्मचारियों ने एक किसान पर गोदाम से जबरन यूरिया की बोरी उठाने का गंभीर आरोप लगाया। घंटों चले इस हंगामे के कारण समिति पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और कामकाज ठप सा हो गया। ज्ञात हो कि इस समय 
में फसलों में यूरिया खाद की भारी मांग चल रही है, जिसके चलते सरकारी समितियों पर किसानों की लंबी लाइनें लग रही हैं। इसी क्रम में बसतौली समिति पर भी सुबह से ही सैकड़ों किसान खाद लेने के लिए आए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यूरिया का स्टॉक कम होने का रोना सुनकर और वितरण की गति धीमी होने के कारण किसान आक्रोशित थे। किसानों का आरोप है कि उन्हें घंटों इंतजार कराया जा रहा है और खाद की कालाबाजारी की आशंका बनी रहती है।
चल रहे हंगामे के दौरान समिति कर्मचारियों ने एक किसान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भीड़ का फायदा उठाकर एक किसान गोदाम के भीतर घुस गया और उसने जबरन यूरिया की बोरी उठाने की कोशिश की। कर्मचारियों का कहना है कि जब उसे रोकने का प्रयास किया गया, तो उसने बदतमीजी करते हुए सरकारी कार्य में बाधा डाली जबकि दूसरी ओर किसानों का कहना है कि कर्मचारी चहेतों को खाद दे रहते हैं और आम किसान लाइन में खड़ा रह जाता है। इसी गहमागहमी के बीच एक किसान ने अपना हक मांगते हुए खाद की बोरी उठाई, जिसे कर्मचारियों ने ‘लूट’ और ‘जबरन’ उठाने का नाम दे दिया। किसानों का यह भी आरोप है कि इस समिति का सचिव व अन्य कुछ कर्मी काफी भ्रष्ट हैं और किसानों का शोषण करने में माहिर हैं जिसके चलते आए दिन छोटी-मोटी नोक झोक तो वैसे भी किसानों से होती रहती है।
विवाद होने के बाद समिति के कर्मचारियों ने वितरण कार्य रोक दिया, जिससे कतार में खड़े अन्य किसानों का गुस्सा और बढ़ गया और मौके पर मौजूद किसानों ने समिति के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सहकारिता विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और दोनों पक्षों को शांत कराया। आए दिन समितियों पर हो रहे हंग़ामों ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि खाद वितरण में पारदर्शिता क्यों नहीं अपनाई जा रही? क्या कर्मचारियों की मिलीभगत से खाद ऊंचे दामों पर निजी दुकानों तक पहुँचाई जा रही है? किसानों के लिए बने इन केंद्रों पर किसान अपमानित क्यों हो रहे हैं?

  • समिति के कर्मचारी इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों और स्थानीय पुलिस से करने की बात कह रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि गोदाम से इस तरह जबरन खाद उठाई जाएगी, तो वे सुरक्षा के अभाव में काम नहीं कर पाएंगे। वहीं किसान संगठनों के स्थानीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों को सुचारू और सम्मानजनक तरीके से यूरिया खाद आदि नहीं दिया जाता है तो वे इसके लिए बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगे। समाचार लिखने तक मिली जानकारी के अनुसार बसतौली समिति पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस बल की निगरानी में वितरण प्रक्रिया को दोबारा शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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