“घर-गृहस्थ में रहकर कोई भी महापुरुष नहीं बन सकता - महात्मा दीपक दास
लखीमपुर खीरी Jan 25, 2026 at 03:30 PM , 433(केके शुक्ला)
लखीमपुर/प्रयागराज।
स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में माघ मेला क्षेत्र में सत्संग कार्यक्रम में महात्मा दीपक दास ने कहा, मुक्ति-अमरता घर-परिवार में रहकर कदापि प्राप्त नहीं किया जा सकता । इसलिए सच्चा सन्त कभी भी किसी को भी घर-परिवार में रहने की छूट नहीं दे सकता। कोई भी घर-परिवार में रहकर किसी प्रकार का भी उपलब्धि हासिल नहीं कर सकता जितने भी महापुरुष हमारे समाज में हुए है घर-परिवार में रहकर नहीं हुये है, जैसे गौतम-महाबीर-नानक-ईसा-मूसा-मुहम्मद आदि-आदि महापुरुष भी घर-परिवार छोड़कर ही समाज में मर्यादित-पूजनीय हुये हैं । घर-परिवार में रहकर महापुरुष बनने की बात तो दूर रही सांसारिक पद जैसे डाक्टर-इन्जीनियर-अधिकारी भी बनना हो तो घर से दूर रहकर पढ़ाई करना पड़ेगा ।
‘‘गगन मण्डल के बीच से झर-झर पड़े अंगार, सन्त न होते जगत में तो जल मऱता संसार’’ सन्त उस क्षमता शक्ति का नाम है अगर धरती जल रही होगी तो वह चाहे तो वर्षा करा देगा, असली सन्त रहेगा न विकट से विकट परिस्थिति को सहज बना देगा । सन्त सत्ता-शक्ति का प्रयोग जानता है। आजकल जो सन्त का वेश बना लिये भीख मांगने के लिए, मेहनत से, श्रम से बचने के लिये और अपने पेट का धन्धा करने के लिये, ये आलसी लोग ये लोग जब सन्त महात्मा का वेश ले लेगें जिसको ईश्वर-परमेश्वर से कोई मतबल नहीं है वही लोग घर-गृहस्थ वालों का चाटुकारिता करते है ताकि उनसे उनका जीवन निर्वाह हो जाये। यदि कोई सन्त-महात्मा घर-गृहस्थों का आशा करते हैं तो वास्तव में सन्त महात्मा नहीं है वह आडम्बरी-पाखण्डी है ।
महात्मा जी ने बताया आज 26 जनवरी के दिन माघमेला शिविर से धर्म धर्मात्मा धरती रक्षार्थ भगवद शोभा यात्रा निकाली जाएगी।






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