“सत्य प्रधान मोक्ष सहित सम्पूर्णत्त्व वाला जीवन ही सच्चा ‘धर्म’ ’’ - महात्मा सुदर्शन दास जी
लखीमपुर खीरी Jan 22, 2026 at 04:35 PM , 337(केके शुक्ला)
लखीमपुर/प्रयागराज। स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में माघ मेला क्षेत्र में सत्संग कार्यक्रम में महात्मा सुदर्शन दास ने कहा, कोई भी पन्थ, सम्प्रदाय तथा अनेक मत मतान्तर धर्म का नाम नहीं है, उसी तरह से कण्ठी माला पहनना, वस्त्र पहनना आदि धर्म नहीं है । दोष रहित, सत्य प्रधान , उन्मुक्त अमर जीवन पद्धति ही धर्म है, धर्म वह विधान का नाम है जिससे हमें बार बार के जनम-मरण के चक्कर से, इस भव सागर से छुटकारा मिल जाता है । मनुष्य का शरीर इस सृष्टि में परमेश्वर का दिया हुवा सबसे श्रेष्ठ सबसे सर्वोत्तम शरीर है, मनुष्य जीवन का एकमेव एक लक्ष्य परमेश्वर को प्राप्त करके अपने जीवन को मुक्ति-अमरता से युक्त भगवद् भाव प्रधान वाला बनाए रहना है । धर्म और मोक्ष के बीच का जीवन एक सर्वोच्च और सम्पूर्णत्त्व वाला जीवन है क्योंकि ऐसे जीवन का रख-रखाव और मालिकान स्वयं परमेश्वर-खुदा-गॉड-भगवान् के पास रहता है। उन्होंने कहा की जन समाज को ऐसा ही जीवन जीना चाहिए जिससे अमन चैन सुख शान्ति के साथ चारो तरफ खुशहाली वाला समाज कायम होगा।






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