राजस्थान में परंपरागत "ग्वाला प्रणाली" को पुनर्जीवित करने की पहल : श्री मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री

राजस्थान , 62

जयपुर, 23 फरवरी। राजस्थान की 16वीं विधानसभा का पंचम सत्र जारी है। विधानसभा परिसर में सोमवार को मीडिया से रूबरू होते हुए शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा गोवंश की बढ़ती समस्या, सड़क दुर्घटनाओं में हो रही वृद्धि, किसानों की फसलों को नुकसान तथा प्लास्टिक सेवन से गोमाताओं की हो रही मृत्यु जैसी गंभीर चुनौतियों के समाधान हेतु एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल प्रारंभ की गई है।

श्री दिलावर ने कहा इस पहल का उद्देश्य वर्षों पुरानी परंपरागत "ग्वाला प्रणाली" को पुनर्जीवित करना है, जिसमें गाँव के सभी पशुओं को एक नियुक्त ग्वाला द्वारा दिनभर चराया जाता था और सायंकाल उन्हें सुरक्षित उनके मालिकों तक पहुँचाया जाता था। यह व्यवस्था पहले ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा थी, जो समय के साथ समाप्त हो गई।
इस नई पहल के अंतर्गत प्रत्येक गाँव में ग्वाला नियुक्त किया जाएगा, जिसे प्रतिमाह ₹10,000 मानदेय दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त चराई के दौरान प्राप्त गोबर पर भी ग्वाले का अधिकार रहेगा, जिससे उसे अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।

उन्होंने कहा कि प्रबंधन को सुचारू बनाए रखने हेतु प्रत्येक 50 ग्वालों पर एक पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) नियुक्त किया जाएगा, जिसे ₹20,000 प्रतिमाह मानदेय तथा ₹5,000 मोटरसाइकिल ईंधन हेतु प्रदान किए जाएंगे।

उन्होंने कहा यह संपूर्ण योजना सरकारी नहीं है, बल्कि समाज के सहयोग, दानदाताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा जनभागीदारी के माध्यम से संचालित की जाएगी।
इस पहल से न केवल गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, किसानों को राहत मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।

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